पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

पेड़ के पत्तों से मिला Inspiration, इस दलित करोड़पति की कहानी है Interesting

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
टीम पीपुल। अशोक खाड़े ने घोर गरीबी देखी है। उनके पिता जूते ठीक करते थे और मां 12 आने रोज पर खेतों में मजदूरी करती थीं। आज अशोक खाड़े 'दास ऑफशोर इंजीनियरिंग प्रा. लि.' के एमडी हैं। उन्होंने अपने दो भाइयों के साथ मिलकर यह कंपनी बनाई थी। उनकी कंपनी में साढ़े चार हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं। जानें कि अशोक की लाइफ कैसे बदली…
 
-अशोक खाड़े का जन्म सांगली जिला (महाराष्ट्र) के पेड नामक गांव में हुआ था। पिता मुंबई में एक पेड़ के नीचे बैठकर जूते सुधारते थे। परिवार गांव में था। परिवार में छह बच्चे थे।
- मां ने बड़े बेटे दत्तात्रेय को पढ़ाई के लिए रिश्तेदार के घर भेज दिया था। फिर भी पांच बच्चों को पाल पाना उनके लिए बहुत मुश्किल था।
- सातवीं कक्षा के बाद अशोक भी दूसरे गांव के स्कूल में पढ़ने चले गए थे। वे हॉस्टल में रहते थे। 1972 में महाराष्ट्र में भीषण अकाल पड़ा। हॉस्टल में अनाज मिलना बंद हो गया। अशोक के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई, क्योंकि उन्हें घर से भी कोई मदद नहीं मिल सकती थी।
- तब अशोक के पिता ने उन्हें मराठी की एक कहावत बताई थी। हिंदी में इसका अर्थ होता है- ‘जब तक पलाश के पत्ते आते रहें, खुद को गरीब मत समझना।' दरअसल, पलाश के पत्ते बिना पानी के भी आ जाते हैं। इन पत्तों से दोने-पत्तल बनाए जाते हैं। यानी खाने के लिए थाली न हो, तो पत्तों से भी काम चलाया जा सकता है।
- अशोक को इस कहावत से बहुत हौसला मिला। उन्होंने जमकर पढ़ाई की। उनकी खाने की समस्या भी हल हो गई। साथ में पढ़ने वाले एक लड़के के परिवार ने उन्हें छह-सात महीने तक खाना खिलाया।
 
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें कि भूखों मरने वाली स्थिति से निकलकर अशोक कैसे बने साढ़े चार हजार एम्प्लाइज वाली कंपनी के मालिक… 
खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- व्यक्तिगत तथा पारिवारिक गतिविधियों में आपकी व्यस्तता बनी रहेगी। किसी प्रिय व्यक्ति की मदद से आपका कोई रुका हुआ काम भी बन सकता है। बच्चों की शिक्षा व कैरियर से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य भी संपन...

    और पढ़ें