अमृतसर। 75 साल की उम्र में भी उनके चेहरे की शोखियां किसी 16 साल के नौजवान के मुकाबले कम नजर नहीं आती। समाज के मौजूदा हालातों पर हास्य व्यंग्य के बाण चलाने वाले रिटायर्ड एसपी प्रेम सागर कालिया बातों ही बातों में सामाजिक मुद्दों पर कटाक्ष करने से नहीं चूकते। उनके चाहने वाले प्यार से उन्हें सागर पंडित के नाम से पुकारते हंै। कालिया साहिब ने भी सागर पंडित को अपना तखल्लुस बना रखा है।
1940 में पाकिस्तान के सियालकोट मे जन्मे सागर पंडित का परिवार बंटवारे से कुछ साल पहले गुरदासपुर में आ बसा। गुरदासपुर और अमृतसर से शिक्षा ग्रहण करने के बाद कालिया ने 1966 में हिमाचल पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर ज्वाइन किया। बकौल प्रेम सागर लिखने का शौक उनको शुरू से ही था। यारों-दोस्तों ने उनकी शायरी की तारीफ करनी शुरू की तो उनका हौसला बढ़ा और उन्होंने काॅलेजों के समारोह में होने वाले कंपीटीशन में अपने शायरी के जलवे दिखाना शुरू कर दिया। यह संयोग ही था कि वर्ष 1969 में जिस दिन नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम रखा कालिया जी उस समय अपने गृहस्थी की ओर कदम बढ़ा रहे थे, यानी इसी दिन उनकी शादी थी।
उनका कहना है कि कविता लिखी नहीं जाती, बल्कि कुदरत इसे अपने आप लिखवा लेती है। उनकी कविताओं में हास्य व्यंग्य का पुट साफ दिखाई देता है। उनकी लिखी कविता ‘मौसम बदल रहा है, हवा भी सर्द है, लिहाफ में पड़ा हूं, घुटनों में दर्द है’ में जहां बुढ़ापे का दर्द बयां किया गया है, वहीं ‘मेरी उम्र की लड़कियां, सब दादियां बन गई हैं, दादियां बन गई हैं कुछ नानियां बन गई हैं, पटियाला पैग पीकर ठुमका लगाया रात को, दादियां और नानियां दीवानियां बन गई हैं’ जैसी कविताएं उनकी जिंदादिली को जाहिर करती है।
अब तक सैकड़ों कविताएं लिख चुके सागर साहिब हास्य कवि सम्राट काका हाथरसी को अपने गुरु मानते है, जबकि मशहूर कवि अशोक चक्रधर उनके खास मित्रों में हैं। कालिया साहिब के दो बेटे फौज में कर्नल हैं, जबकि एक बेटा आशुतोष कनाडा में बैंक में एडवाइजर है। उनका कहना है कि वह जिंदगी की अंतिम सांस तक हास्य व्यंग्य में डूबे रहना चाहते हैं।
यह सम्मान हैं उनके नाम
सागर पंडित को 2008 में टोरंटो में हुए हिन्दी दिवस पर चीफ गेस्ट के तौर पर सम्मानित किया गया। वर्ष 2011 में सीनियर सिटीजन क्लब हिन्दू सभा की ओर से ब्रम्टन में उन्हें कवि श्री के सम्मान से नवाजा गया। 2012 में वह साफमा के डेलीगेट्स के साथ पाकिस्तान गए जहां उन्होंने हास्य व्यंग्य पर कविताएं पेश की। वर्ष 2013 में इंडियन अंबेसी इजिप्ट में हुए कवि सम्मेलन में उन्हें सम्मान दिया गया। इसी साल
हैदराबाद की गीत चांदनी संस्था की ओर से उन्हें श्रेष्ठ कवि के सम्मान दिया गया। सागर पंडित उर्दू, हिन्दी और पंजाबी की करीब एक दर्जन मैगजीन और अखबारों में अपनी कविताएं लिख चुके है।