पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बिजली, पानी, सीवरेज और कूड़े का इकट्ठा बिल लेने की तैयारी

बिजली, पानी, सीवरेज और कूड़े का इकट्ठा बिल लेने की तैयारी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अवैध निर्माण पर एक्शन की जगह मांग रहे रिपोर्ट

लक्कीने कहा कि लोकल बॉडी मंत्री की नाक तले अवैध निर्माण धड़ाधड़ हो रहे हैं। मेयर खुद मान रहे हैं कि रिहायशी मकान पास करवा कर काॅमर्शियल इमारतें बन रही हैं। वहीं इसके बावजूद कार्रवाई की बजाए मेयर एमटीपी विभाग से 15 दिनों में रिपोर्ट मांग रहे हैं। लक्की ने लोकल बॉडी मंत्री जोशी और मेयर अरोड़ा से अपील की कि वह वित्त मंत्री से शहर के विकास के लिए ग्रांटें लेकर आएं, ताकि स्मार्ट सिटी बनाने का सपना पूरा हो सके।

भास्कर न्यूज | अमृतसर

पंजाबसरकार ने नया फैसला लेते हुए बिजली, पानी, सीवरेज और कूड़े का बिल एक साथ लेने की तैयारी कर ली है। जिसके बाद जनता पर इन बिलों का इकट्ठा बोझ पड़ जाएगा। यह कहना है नगर निगम में विपक्ष के नेता पार्षद राज-कंवलप्रीत लक्की का। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह सारे बिल बारी-बारी उतारने पड़ते हैं, जिससे लोगों की जेब पर एक साथ आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है।

लक्की ने कहा कि एनडीए सरकार बनने के बाद अमृतसर को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की गई है। वहीं केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू ने स्मार्ट सिटी निवासियों को टैक्स दो और विकास करवाओ का नारा दिया है। जिससे साफ है कि गुरु नगरी स्मार्ट सिटी नहीं टैक्स सिटी बनने जा रही है।

1.5लाख घरों से वसूले जाएंगे 3 करोड़ रुपए

उन्होंनेकहा कि मेयर बख्शी राम अरोड़ा ने 109 करोड़ के सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट के लिए टेंडर मांगे हैं, जिसकी आखिरी तिथि 30 सितंबर है। इस प्लांट के लगने के बाद शहर के 1.5 लाख घरों से 3 करोड़ सालना यूजर चार्जेस वसूले जाएंगे।

भाजपादफ्तर की नींव हिलने से सरकार हिली

लक्कीने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी कंडम इमारतों के गिरने से कई जानें गई, लेकिन लोकल बॉडी मंत्री अनिल जोशी और मेयर किसी का पता लेने तक नहीं गए। वहीं खन्ना स्मारक के नजदीक निर्माणाधीन पार्किंग के कारण भाजपा दफ्तर में पानी भरने से सारी सरकार हिल गई।

एक करोड़ खर्च करके दिल्ली की कंपनी को बुला लिया गया। उधर सांसद कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने इंग्लैंड होने के बावजूद उन्होंने कंडम इमारतों के कारण हुए हादसों पर दुख जताया और पार्टी नेताओं को पीड़ितों के घर भेजा। कंडम इमारतों के बारे में कोई पॉलिसी नहीं बन पाई है।