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मेयर के 730 दिन, हाउस चला 8 दिन

7 वर्ष पहले
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खस्ता निगम का पहिया खींचते रहे बख्शी राम

दीपकभंडारी | अमृतसर

मेयरबख्शी राम अरोड़ा को मेयर का ताज पहने दो वर्ष बीत गए हैं, 19 सितंबर 2012 को उन्होंने मेयर का ताज पहना था। मेयर बनने के बाद अरोड़ा ने दो साल के कार्यकाल के दौरान हाउस की आठ बैठकें ही बुलाई हैं। अपनों ने ही मेयर को घेरा, डिप्टी मेयर ने अवैध कब्जों को लेकर भूख हड़ताल करने की धमकी दे डाली। कई पार्षदों ने शहर में अवैध निर्माण को लेकर सीबीआई जांच करवाने की मांग कर डाली। हर दिन निगम की वित्तीय हालत बिगड़ती रही। हाउस टैक्स समाप्त हो गया और प्रापर्टी टैक्स लोगों ने दिया नहीं। ही सरकार प्रापर्टी टैक्स को लेकर कोई नीति ही बन पाई, जिससे निगम की हालत �\\\"र भी पतली हो गए। अरोड़ा को मलाल है कि पूर्व मेयर श्वेत मलिक को 2007 में मेयर बनते ही विकास के लिए 100 करोड़ और बाद में 400 करोड़ रुपए विकास कार्यों के लिए मिले थे। जबकि उन्हें दो साल के दौरान फूटी कौड़ी नहीं मिली।

शायद पहली बार ऐसा हुआ कि निगम के एमटीपी ने किसी मेयर पर आरोप जड़े हों कि वह 3 लाख रुपए महीना मांगते हैं। इतना ही नहीं मेयर पर जोशी काॅलोनी की 4067 गज भूमि को अलाट किए जाने को लेकर 50 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए। इसके लिए कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी ने जांच के आदेश भी दे दिए, लेकिन जांच शुरू भी नहीं हो पाई। मेयर ने हुडको से 100 करोड़ और बैंक आॅफ इंडिया से 50 करोड़ रुपए कर्जा लेने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया, चंडीगढ़ के दर्जनों चक्कर काटे और हुडको से 52 करोड़ रुपए का कर्ज पास करवाने में भी सफल हो गए। इसकी पहली किस्त 4 करोड़ रुपए भी गए, लेकिन मेयर ने अगली किस्त लेने से यह कह कर इंकार कर दिया कि पैसा तो ले लें, लेकिन ब्याज कहां से चुकाएंगे।

लंबित पड़े प्रोजेक्टों में से अरोड़ा केवल सिटी बस को चलाने में सफल रहे। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अधर में है, उसकी फाइनांशियल बिड खोले जाने में अभी की दिन बाकी हैं। भंडारी पुल की स्लैब को गिरे कई माह बीत गए। फिर भी अभी तक भंडारी पुल की चौड़ाई का काम शुरू नहीं हो सका। कैनाल बेस्ड प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सका। जायका प्रोजेक्ट धीमी गति होने के कारण फीका रहा।

वादापूरा नहीं कर पाए

मेयरबख्शी राम अरोड़ा ने सभी पार्षदों से वादा किया था कि वह हरेक वार्ड में 31-31 लाख रुपए के विकास कार्य करवाएंगे, लेकिन वह