नाटशाला में दास्तां-ए-कामागाटामारू
भास्करन्यूज| अमृतसर
पंजाबनाटशाला में मंच रंगमंच की तरफ से चल रहे थिएटर फेस्टिवल के तहत शनिवार को केवल धालीवाल निर्देशित नाटक \\\"अग्ग लौंदी रही समुंदरां तारियां\\\' मंचित किया गया। कामागाटामारू घटना के 100 साल को समर्पित इस नाटक को अजमेर रोडे ने लिखा है।
नाटशाला के विशेष सहयोग से चल रहे इस फेस्टिवल के तहत पिछले तीन हफ्तों से शनिवार और रविवार को नाटकों का मंचन किया जाता रहा है। रविवार को फेस्ट का इसी नाटक से समापन भी होगा। खैर, नाटक में 1914 के दौर में कामागाटामारू के जरिए किस तरीके से 300 भारतीय कैनेडा जाते हैं मगर उनको बर्तानवी सरकार वहां उतरने नहीं देती। दो महीने तक उनको कामागाटामारू जहाज पर ही समुद्र के भीतर बिताना पड़ता है।
नाटक में वहां रह रहे पंजाबियों द्वारा उनकी लड़ाई लड़ने से लेकर वापसी पर कोलकाता में जहाज के पहुंचने पर सभी को शहीद करने की घटना को बड़े ही मार्मिक तरीके से पेश किया गया। नाटक में राजिंदर नागी, गुरतेज मान, पवेल संधू, पवन दीप, सर्बजीत लाडा, सुखविंदर विर्क, गुरमेल, नरिंदर सेठी, मनजिंदर अंजान, अक्षित सेठी, कोमल प्रीत आदि ने किरदार निभाया है। नाटशाला के संस्थापक जतिंदर बराड़ ने नाटक की बेहतरीन पेशकारी और फेस्टिवल के लिए कलाकारों तथा केवल धालीवाल को बधाई दी है।
थिएटर फेस्ट में केवल धालीवाल निर्देशित नाटक \\\"अग्ग लौंदी रही समुंदरां तारियां\\\' का मंचन किया गया। कामागाटामारू घटना के 100 साल को समर्पित इस नाटक को अजमेर रोडे ने लिखा है। रविवार को फेस्टिवल का समापन इसी नाटक के साथ होगा।