अमृतसर। शहर में स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों का कारण लोगों का सही समय पर अस्पताल पहुंचना है। अब तक शहर के आठ लोगों की इसके कारण मौत हो चुकी है। हालांकि इनमें से तीन की स्वाइन फ्लू के टेस्ट की रिपोर्ट आनी बाकी है। जीएनडीएच में आइसोलेशन वार्ड के इंचार्ज डॉ. एनएस नेकी का कहना है जो बी स्टेज में अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनकी सेहत में सुधार भी देखने को मिला है।
सांससे जुड़ी है यह बीमारी
डॉ.नेकी ने बताया कि स्वाइन फ्लू सांस से जुड़ी बीमारी है, जो टाइप के इन्फ्लुएंजा वायरस से होती है। इसे ही हम एच1एन1 वायरस अौर स्वाइन फ्लू कहते हैं। सर्दी के मौसम में यह सक्रिय हो जाता है। अगर मौसम थोड़ा ठीक हो जाए और तापमान थोड़ा बढ़ जाए तो यह वायरस का असर कम हो जाता है।
हवामें फैलता है वायरस
यह वायरस हवा के माध्यम से और स्पर्श से फैल जाता है। अगर इंफेक्टिड व्यक्ति कहीं छींक दे या थूक दे, यहां उसके मुंह से निकला तरल पदार्थ हमारे संपर्क में जाए तो वायरस दूसरे व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेता है।
हाथों में 30 मिनट जीवित रहता वायरस
अगर हम अपने मुंह को ढक कर रखें, हाथ धोते रहें तो हम इससे बच सकते हैं। यह वायरस जब तक शरीर में प्रवेश करे तो खतरनाक नहीं होता। एच1एन1 वायरस प्लास्टिक बैग पर 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे और हाथों पर 30 मिनट तक जीवित रह सकता है। साधारण साबुन से हाथ धोने, सेनिटेशन का प्रयोग करने से भी यह वायरस खत्म हो जाता है।
कफ कोल्ड, फीवर और दर्द हैं लक्षण
नाक बहना, छींकना, शरीर में दर्द, सिर दर्द, कफ कोल्ड, बुखार, गले में खराश आदि स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं। आम फ्लू और स्वाइन फ्लू में अधिक अंतर नहीं है, लेकिन अगर बुखार फ्लू तीन दिनों से अधिक बना रहे और व्यक्ति को रेस्पिरेटरी डिजीज हो जाए तो यह स्वाइन फ्लू हो सकता है। रेस्पिरेटरी डिसीज से पहले एच1एन1 वायरस का टेस्ट भी करवाने की आवश्यकता नहीं होती।
कब करें डॉक्टर से संपर्क
स्वाइनफ्लू की बीमारी को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है। कैटेगरी आम वायरल की तरह ही होती है, जिसमें नाक बहना, छींकना, शरीर में दर्द, सिर दर्द, कफ कोल्ड के लक्षण मिलते हैं। इस कैटेगरी में बुखार होता है, लेकिन 100 डिग्री से कम ही रहता है। बी कैटेगरी में बुखार तेज हो जाता है। अगर बुखार एक-दो दिनों में कंट्रोल हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सी कैटेगरी जानलेवा हो जाती है। इसमें मरीज को निमोनिया हो जाता है और रेस्पिरेटरी सिस्टम पर असर होना शुरू हो जाता है। सांस रुकने से मरीज की मौत हो जाती है।
वैक्सी नेशन अवेलेबल
डाॅ.नेकी ने बताया कि इस बीमारी के लिए अब वेक्सीनेशन ट्रायवेलेंट और टैट्रावेलेंट भी मार्केट में उपलब्ध हैं, लोग डॉक्टर से संपर्क कर इसे लगवा सकते हैं। इसे लगवाने से स्वाइन फ्लू होने का रिस्क काफी हद तक कम हो जाता है।