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मुल्क लुट रहा है, जागो हिंदोस्तां वालो

7 वर्ष पहले
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विरसाविहार में मंच रंगमंच की तरफ से चल रहे 12वें नेशनल थिएटर फेस्टिवल के सातवें दिन केवल धालीवाल निर्देशित पंजाबी नाटक किस ठग ने लुट्या शहर मेरा का मंचन किया गया। डॉ. ममता कालिया के नावेल दौर से प्रेरित इस नाटक में नौकरी की तलाश में शहर, राज्य और मुल्क छोड़ते जा रहे युवाओं की कहानी तथा विदेशों की बड़ी कंपनियों का भारतीय बाजार पर होने वाला कब्जे की दास्तां है।

नाटक में बताया गया है कि आज युवा पढ़-लिख कर आगे जा रहा है। नौकरी मिलती है वह अपना शहर, स्टेट यहां तक की देश छोड़ने तक को राजी है। वहां जाने के बाद पीछे छूट रहे हैं मां-बाप। युवा पैसा तो बहुत कमा रहा है मगर उसके जाने के बाद उसके अपनों का हाल बुरा है, क्योंकि जाने के बाद वह मुड़कर नहीं आता। नाटक में इस ब्रेन ड्रेन को बड़े ही मार्मिक तरीके से पेश किया गया है। कहानी में बड़ी विदेशी कंपनियों का हमारे बाजारों पर कब्जा भी दिखाया गया है। किस तरीके से हमारी देशी कंपनियों और उत्पाद सिमट रहे हैं और उनकी जगह ले रहे हैं विदेशी उत्पाद और कंपनियां। केवल धालीवाल कहते हैं कि 200 साल पहले मुल्क में एक विदेशी कंपनी ईस्ट इंडिया आई थी तो हमारा क्या हाल हुआ। अब तो विदेशी कंपनियों की फेहरिश्त ही इतनी लंबी हो गई है कि गिन पाना मुश्किल है। अगर इन दोनों मुद्दों को रोका गया तो गुलामी हमसे ज्यादा दूर नहीं। नाटक में गुरतेज मान, पवनदीप, सुखविंदर विर्क, मनजिंदर सिंह, रमनदीप कौर, दीक्षा, प्रीति सिंह, अमनप्रीत बल, मुस्कान, पवनदीप बठिंडा, नरिंदर सेठी आदि ने किरदार निभाया है।

आज पेश होगा डाकघर

विरसाविहार में चल रहे 12वें नेशनल थिएटर फेस्टिवल के आठवें दिन शनिवार को नाटक डाकघर का मंचन होगा। रबिंद्र नाथ टैगोर लिखित नाटक को पेश किया है मणिपुर के थिएटर ग्रुप कला क्षेत्र ने।

विरसा विहार में पेश किए गए नाटक में बताया गया है कि बड़ी विदेशी कंपनियां कैसे हमारे बाजारों पर कब्जा कर रही हैं।