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निगम में बैक डोर से भर्ती मुलाजिमों ने खोला मोर्चा
आर्थिकतंगी से जूझ रहे नगर निगम के पास भले ही अपने मुलाजिमों को सैलरी देने के लिए पैसे हों, मगर बैक डोर से भर्ती करके अतिरिक्त बोझ डालने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सियासी दबाव में की जा रही इन अवैध भर्तियों के कारण नौकरी के असल हकदार वंचित हो गए हैं। इस मुद्दे को लेकर निगम की सांझी संघर्ष कमेटी ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
300लोगों को कर लिया भर्ती
सांझीसंघर्ष कमेटी के बैनर तले हुई बैठक में सफाई मजदूर यूनियन बिट्टा ग्रुप के प्रधान विनोद बिट्टा, नगर निगम कर्मचारी तालमेल दल के हरजिंदर सिंह वालिया, युवा नेता आशू नाहर, नगर निगम सप्लाई टेक्निकल यूनियन, नगर निगम वर्कर यूनियन (सीआईटीयू) के पदाधिकारियों के अलावा अरुण कुमार सहजपाल, परमजीत पम्मा, सुरिंदर सिंह, नरिंदर गिल, कस्तूरी लाल, केवल किशन, मेजर सिंह, बलविंदर सिंह बिल्लू, कर्मजीत सिंह केपी, दलजीत सिंह और चरणजीत सिंह आदि शामिल हुए। उक्त लोगों ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ दिनों से निगम में सियासी दबाव के चलते डीसी रेट और सर्विस प्रोवाइडरों के 300 लोगों को गलत तरीके से भर्ती किया गया है। इसके लिए तो कहीं इश्तिहार दिया गया और ना ही नियम-कानून का पालन किया गया।
इनपर लगे आरोप
बिट्टाऔर वालिया ने कहा कि इस भर्ती में एक्सईएन तिलक राज और एसई जसविंदर सिंह का हाथ है। इन लोगों का कहना है कि 346 सफाई मुलाजिमों की भर्ती की मंजूरी मिल गई है, उनकी फाइलें भी जमा हो चुकी हैं, मगर भर्ती नहीं हुई। आशु नाहर का कहना है कि निगम के 12 जोनों में तीन-तीन के हिसाब से 36 लोगों को सियासी दबाव में रखा गया। निगम ऑटो वर्कशाप में भी अवैध रूप से कुछ भर्तियां हुई हैं। आशू का कहना है कि जिन लोगों की ड्यूटी के दौरान मौत हुई है उनके आश्रितों को भी नौकरी नहीं दी गई है। उक्त नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर इस धांधली को रोक कर असल हकदारों को नौकरी दी गई तो संघर्ष तेज किया जाएगा। हालांकि एक्सईएन तिलकराज ने इन आरोपों को नकारा है और कहा कि इस तरह की भर्ती उनके लेबल की बात नहीं है। एसई जसविंदर सिंह का मोबाइल मिलाया पर उन्होंने फोन नहीं उठाया।
नगर निगम की सांझी संघर्ष कमेटी के नेताओं ने भर्ती के खिलाफ टाउन हाल में विरोध जताया।