अमृतसर. समाजसेविका प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा है कि गुजरात, दिल्ली तथा अन्य दूसरे प्रांतों के साथ ही पंजाब में प्रतिदिन कोई कोई व्यक्ति स्वाइन फ्लू के कारण मौत के मुंह में जा रहा है। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार के अधिकारी और मंत्री केवल कुछ बयान देकर ही अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं।
पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए यह लज्जा की बात है कि सन 2009 में स्वाइन फ्लू के टेस्ट के लिए जो योजना बनी और जिसके लिए केंद्र से धन भी प्राप्त हुआ वह काम आज तक पूरा नहीं हो पाया। पंजाब में दो टेस्ट लैब बनाने की केंद्र ने मंजूरी और आर्थिक सहायता दी थी। आश्चर्य है कि अब फरवरी 2015 में यह कहा जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन अर्थात डब्ल्यूएचओ से स्वीकृति मिलने के कारण मरीजों को अधिकृत रिपोर्ट नहीं दी जा सकती। ध्यान रखने योग्य यह भी है कि स्वाइन फ्लू की टेस्ट किट जो केवल सवा लाख रुपये में मिल जाती है, वह भी पंजाब सरकार अभी तक अमृतसर की लेबोरेट्री में नहीं दे पाई।
एक टेस्ट किट से पच्चीस रोगियों की जांच हो जाती है, पर बेबस रोगी अस्पताल में तड़पते और मरते रहे, लेकिन टेस्ट के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में ही अधिकारियों को दौड़ना पड़ा। सरकार यह बताए कि सरकारी लापरवाही से जो स्वाइन फ्लू के रोगी मारे गए उनके परिवारों को क्या मुआवजा दिया जा रहा है और अमृतसर के अतिरिक्त दूसरी लेबोरेट्री कहां बनाई गई हैं और उसमें काम कब तक शुरू हो जाएगा।