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भूली सरकार, लोग खुद बनाने में लगे यादगार

6 वर्ष पहले
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अजनाला/अमृतसर. 1857 में कस्बे में शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों की याद में यहां के ऐतिहासिक कुएं का लेंटर डालने का काम गुरुवार को शुरू किया गया। इस काम को शहीदां वाला खूह प्रबंधक कमेटी ने प्रधान अमरजीत सिंह सरकारिया के नेतृत्व में किया है। कमेटी के लोगों ने इस जगह की सरकार की तरफ से की जा रही उपेक्षा पर नाराजगी भी जताई है।

बरतानवी सरकार के खिलाफ बगावत करके लाहौर से 500 सेनानी भागे थे, जिसमें से 218 को रावी दरिया किनारे शहीद कर दिया था, जबकि 282 को यहां की तहसील में लाकर कैद किया गया था और गोलियों से भून कर उनको इसी कुएं में दफ्न कर दिया गया था। इसके बाद यहां पर गुरुद्वारा बन गया था। 28 फरवरी 2014 को कमेटी की पहल पर इन अस्थियों को निकाला गया और हरिद्वार में ले जाकर उनका विसर्जन किया गया था।
हालांकि इस दौरान पक्ष तथा विपक्ष ने बड़े वादे किए थे मगर कोई वादा पूरा नहीं हुआ। इस अनदेखी के बाद खुद ही उन लोगों ने नींव पत्थर रखा और कुएं को यादगार बनाने का काम शुरू कर दिया। इस मौके पर काबल सिंह शाहपुर, मनजीत सिंह छीना, हरभजन सिंह नेपाल, डॉ. मनजीत सिंह, जगदीशलाल देवगन मौजूद थे।