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सैलेरी ग्रांट लिए बिना खत्म नहीं होगा संघर्ष
सूबेका कॉलेज स्टाफ सैलेरी के भुगतान समेत अन्य मांगों को लेकर अपने बायकाट के फैसले पर अटल है। हालांकि जीएनडीयू प्रशासन ने 15 और 19 के एग्जाम को बायकाट के मद्देनजर पोस्टपोन कर दिया है, मगर कॉलेजों का कहना है कि जब तक मांगें मानी नहीं जातीं तब तक वह लोग विरोध जारी रखेंगे। यह बायकाट ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले किया जा रहा है। पंजाब एंड चंडीगढ़ कॉलेज टीचर यूनियन, प्राइवेट कॉलेज नाॅन टीचिंग इंप्लाइज यूनियन पंजाब एंड चंडीगढ़, प्रिंसिपल फेडरेशन और मैनेजमेंट फेडरेशन साथ मैदान में हैं।
पंजाब एंड चंडीगढ़ कॉलेज टीचर यूनियन के महासचिव प्रो. एचएस वालिया ने बताया कि सरकार ने 18 महीनों से कॉलेजों को जारी की जाने वाली 95 फीसदी सैलेरी ग्रांट नहीं दी है। इसके कारण स्टाफ को सैलेरी नहीं मिल पाई है। उनका कहना है कि इसके कारण टीचिंग और नान टीचिंग का करीब 4,000 स्टाफ प्रभावित हुआ है। इससे सूबे के 136 एडेड कॉलेजों में पढ़ने वाले ढाई लाख के करीब स्टूडेंट का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। वालिया के मुताबिक सरकार के पास कॉलेजों का कुल 270 करोड़ रुपया बकाया था, इसमें से सिर्फ 43 करोड़ की एक किस्त जारी की गई तब से इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया। नानटीचिंग यूनियन के प्रधान मदन लाल खुल्लर ने खाली पदों के भरने पर कहा कि इन कॉलेजों में 50 फीसदी पद खाली पड़े हैं। उनका कहना है कि 2006 से भर्ती पर रोक लगी है। तब से इस तरफ गौर नहीं किया गया। अन्य मांगों के बारे में उनका कहना है कि पदों की भर्ती के साथ मेडिकल और आवासीय भत्ते देने के अलावा अन्य मांगों पर भी गौर किया जाए। उक्त लोगों का कहना है कि सरकार हर बार किस्तों में ग्रांट देकर काम निकाल लेती है, मगर इस बार ऐसा नहीं होने वाला।