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पागलखाने को जाने वाली 81 नंबर बस मशहूर थी
प्रस्तुति : अनिल शर्मा
1970 केदशक में अमृतसर शहर में आज की तरह ना तो ट्रैफिक था और ना ही इतना शोर शराबा। सब कुछ इतना शांत और दिल को सुकून देने वाला था कि पुराने दिन याद करके ऐसा लगता है जैसे कोई सपना देखा हो। मजीठा रोड की रहने वाली मंजीत कौर बताती हैं कि उस समय वह नवां कोट इलाके में रहते थे। कौर की बेटी सरकारी मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। मंजीत बताती हैं कि जब वह पढ़ती थी तो लड़कियां यूं कारों या स्कूटर पर स्कूल नहीं आती-जाती थीं। वह नवां कोट से माल रोड सरकारी स्कूल तक पैदल जाती और पैदल ही वापिस आती थी। पैदल चलना लोगों की आदत में शुमार था। ना कभी थकान का अहसास हुआ था और ना ही यह मुश्किल भरा लगता था। गर्मियों की झुलसा देने वाली दोपहर हो या कड़कती ठंड के दिन। स्कूल जाने का सिलसिला इसी तरह जारी रहता था। हां, कभी कभार जब शहर में ही घर से दूर जाना होता तो तांगे की सवारी को अहमियत दी जाती। तांगा रिक्शा से काफी सस्ता पड़ता था। नवां कोट से बस स्टैंड तक 25 पैसे में तांगे का सफर हो जाता था। उन दिनों शहर में लोकल बस भी चलती थी। 81 नंबर की बस आज भी नहीं भूलती।
यह बस इस्लामाबाद से मेंटल हॉस्पिटल तक चलती थी। शहर के अलग अलग इलाकों से होती हुई यह बस करीब 60 मिनट में अपनी मंजिल तक पहुंच जाती थी। बस को लेकर अक्सर लोग एक दूसरे से मजाक किया करते थे। क्योंकि यह बस मेंटल हॉस्पिटल तक जाती थी इसलिए अगर किसी को किसी बात पर तंग करना होता तो कहा जाता था कि उक्त व्यक्ति को 81 नंबर बस पर बिठा दिया जाना चाहिए।