सितंबर से 90% घंटेंगे बिजली फाल्ट
अधिकलोड से खराब हो जाने वाले ट्रांसफार्मर, लाइन में पड़ने वाले फाल्ट जैसी समस्याओं से जूझ रहे बिजली उपभोक्ताओं को गर्मियों में राहत मिल सकती है। जर्जर हो चुकी बिजली की लाइनों को बदला जाएगा। शहर में 579 बिजली के नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे और लोड की क्षमता बढ़ाने के लिए 634 ट्रांसफार्मर लगेंगे। इसके अलावा पावर हाउस स्थित फीडरों में सुधार होगा और उपभोक्ता के घरों में लगे मैकेनिकल मीटरों को बदल कर उनकी जगह पर इलेक्ट्राॅनिक बिजली के मीटर लगाए जाएंगे। केंद्र सरकार की रिस्ट्रक्चर एक्सूलेटेड पावर डिवेलपमेंट रिफार्म प्रोग्राम के दौरान पावर फाइनांस कार्पोरेशन की ओर से पावरकाॅम को जारी किए 137. 29 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का पूरा काम लार्सन एंड टर्बो कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है।
238करोड़ का बजट मिला
केंद्रसरकार की रिस्ट्रक्चर एक्सूलेटेड पावर डिवेलपमेंट रिफार्म प्रोग्राम की नई योजना के तहत पावरकॉम को 238 करोड़ का बजट मिला है। इसमें बिजली के लाॅसेस कम करने के लिए लोगों के घरों के अंदर लगा बिजली मीटर पिलर बक्सों में लगाने के अलावा 66 केवी के नए बिजली घर बनाने भी शामिल है।
दस मई 2013 में एलएंडटी कंपनी को वर्क आॅर्डर सौंपा गया था। 1 जनवरी 2014 को प्रोजेक्ट का काम शुरू किया गया।
शहर के सिटी और सब अर्बन सर्किल में बिजली के साढ़े 9 हजार बिजली के खंभे लगाए जाएंगे। इन खंभों की 30 से 35 मीटर की दूरी रखी गई है ताकि तेज हवा से एलटी तारें आपस में टकराएं नहीं और इससे बिजली सप्लाई बंद हो। इसमें 11 मीटर के 6 हजार खंभे लगेंगे और अब तक 19 खंभे लगाए जा चुके हैं, जबकि 9 मीटर के 3500 बिजली लगाए जाएंगे और 2800 खंभे लग चुके हैं।
ऐसेकरते हैं काम
एलएनटीकंपनी वाले जिस इलाके में काम करते हैं, वहां अपने कर्मचारियों को पहले टोकन देते हैं और उसके बाद बिजली की लाइनें बंद करवा कर परमिट लेते हैं। शाम को काम खत्म करने के बाद सभी कर्मचारियों से टोकन वापस लेकर बिजली की लाइनें चालू की जाती हैं।
^आए दिन पड़ने वाले फाल्टों से राहत मिलेगी और बिजली के लाॅसेस भी कम होंगे। इस प्रोजेक्ट के बाद अगर पावरकॉम 15 प्रतिशत बिजली लासेस कम करती है तो उन्हें 50 प्रतिशत तक कर्ज माफ होगा। राजीवपराशर, एडिश्नल एक्सईएन, आरएपीडीआरपी
अघोषित कट नहीं लगेंगे
शहरमें सर्दियों के सीजन में 35 लाख यूनिट और गर्मियों के सीजन में 50 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। डिमांड बढ़ने से कभी बिजली की तारें टूटती हैं तो कभी ट्रांसफार्मरों के फ्यूज उड़ जाते हैं। ऐसे में पुराने बिजली के उपकरणों पर लोड बढ़ने के साथ इनकी क्षमता भी कम होती जाती है। इसी कारण गर्मी के सीजन में बिजली की लाइनों में फाल्ट और ट्रांसफार्मर में खराबी होने से बिजली सप्लाई प्रभावित होती है।
नए बिजली घर: 66केवी के दो बिजली घर बनाए जा रहे हैं। इसमें सुल्तानविंड इलाके में सितंबर 2014 में शुरू किया गया। और जून 2015 में पूरा होगा। जबकि दूसरा अगस्त 2014 को इस्लामाबाद में शुरू किया गया और मार्च 2015 में खत्म होगा। इलाके अलावा तीसरा मेडिकल कालेज चौथा गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी और पांचवां सेंट्रल जेल के पास बिजली घर बनेगा। परंतु इनके लिए अभी तक सरकार ने जमीन मुहैया नहीं करवाई।
नए कंडक्टर: 11केवीफीडरों का 188 किलोमीटर तक कंडक्टर बदला जाएगा और 80 किलोमीटर तक बदला गया है।
नएट्रांसफार्मर: 200केवी के कुल 579 ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे और 350 लगाए दिए गए।
बढ़ेगीलोड क्षमता: 100केवी की जगह 200 केवी के 634 ट्रांसफार्मर लगेंगे और 70 लग चुके हैं।
एलटीलाइन: 300किलोमीटर तक एलटी लाइन बदली जाएगी और 49 किलोमीटर तक बदली गई है।
नईएलटी: 30किलोमीटर तक नई एलटी लाइन डाली जाएगी और साढ़े 4 किलोमीटर तक डाली गई।
थ्रीफेस के मीटर: थ्रीफेस के 360 इलेक्ट्राॅनिक मीटर लगाए और सिंगल फेस के 33 हजार में से 5 हजार बदले गए।
कंपनी के कर्मी सुबह लाइनें बंद कर टोकन लेते हैं और शाम को काम खत्म करने के बाद सभी से टोकन लेकर बिजली की सप्लाई चालू की जाती है।