पैसा था, जमीन, जिद से बनाया स्कूल
देशके भविष्य को संवारने के उनके दृढ़ संकल्प के आगे तमाम मुश्किलें खुद खुद घुटने टेकती चली गईं। दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा था और जेब खाली। तमाम परेशानियों और मुश्किलों को दरकिनार करते हुए मास्टर सरदार सिंह अपने मिशन को कामयाब बनाने के लिए जी जान से जुट गए। फिर एक दिन उनका सपना साकार हुआ। मास्टर जी के नेतृत्व में 7 स्टूडेंट्स के साथ छोटे से कमरे में शुरू किया गया, निष्काम सेवा पब्लिक स्कूल 200 से अधिक स्टूडेंट्स के साथ आज अपने मकसद की ओर बढ़ रहा है।
बकौल सरदार सिंह 20 साल पहले जिस सपने की बुनियाद उन्होंने रखी थी, आज वह हकीकत बनकर उनके सामने खड़ा है। एफसीआई नौकरी करने वाले सरदार सिंह छुट्टी के समय घर जाते हुए शरीफपुरा इलाके के करीब से गुजरती रेलवे लाइनों के पास-पास छोटे-छोटे बच्चों को कागज इकट्ठे करते हुए देखते तो इन बच्चों को पढ़ाने का ख्याल अकसर उनके मन में आता। अपनी इस सोच को अमलीजामा पहनाने के लिए मास्टर जी ने बच्चों के मां-बाप को इन्हें पढ़ाने की गुजारिश की। धीरे-धीरे कुछ बच्चों को इकट्ठा कर पढ़ाना शुरू कर दिया। सिविल सर्जन आॅफिस के बाहर 18 गुणा 36 के कमरे में 7 बच्चों से स्कूल की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने 2004 में नौकरी छोड़ दी। मौजूदा समय में नर्सरी से 10वीं तक चलने वाले इस स्कूल में 201 स्टूडेंट्स हैं और इन्हें पढ़ाने के लिए 11 टीचरों का स्टाफ है।
बच्चों को सुबह के समय रिफ्रेशमेंट के तौर पर बिस्कुट और सर्दियों में मूंगफली, जबकि दोपहर को मुफ्त खाना भी दिया जाता है। मास्टर जी बताते हैं कि उनके स्कूल के तीन बच्चे इस समय होटल मेनेजमेंट की डिग्री, जबकि कुछ बच्चे बीए, बीकाॅम की पढ़ाई कर रहे हैं। सरदार सिंह का कहना है कि इन बच्चों को अच्छे नागरिक बनाना उनका सपना है।
मास्टर जी की निष्ठा को देखते हुए तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर काहन सिंह पन्नू ने सिविल सर्जन आॅफिस के ठीक सामने बनी सीएमओ आॅफिस की जगह का एक हिस्सा स्कूल को दे दिया।