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‘पैसों की कमी के कारण पूरे प्रबंध नहीं’

6 वर्ष पहले
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स्वाइनफ्लू के इलाज में लापरवाहियों की मिल रही शिकायतों के चलते मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च मिनिस्टर अनिल जोशी ने गुरु नानक देव अस्पताल का अचानक दौरा किया। उन्होंने स्वाइन फ्लू के लिए बनाई गई आइसोलेशन वार्ड में दाखिल मरीजों को देखा और उन्हें मिलने वाली दवाइयों का प्रबंध देखा। जोशी ने कहा कि इस बीमारी से मरीजों को बचाने के लिए जितने पुख्ता प्रबंध होने चाहिए, वह पैसों की कमी के कारण नहीं हैं, लेकिन टेमीफ्लू दवाई, वेंटिलेटर और सेफ्टी किट का इंतजाम करके मरीजों की बचाने की कोशिश जारी है। स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में पैनिक ज्यादा क्रिएट हो रही है। टेस्ट करवाने के लिए वहीं लोग आए, जिन्हें लगता है कि उनके शरीर में इस बीमारी के लक्षण हैं।

डाॅक्टरों ने जोशी को बताया कि मेडिकल काॅलेज अमृतसर को स्वाइन फ्लू का टेस्ट करने की मान्यता मिल गई है। अब पीजीआई चंडीगढ़ में टेस्ट करने के लिए सैंपल नहीं भेजे जाएंगे। अभी तक इस बीमारी से 6 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 मरीज अभी दाखिल और तीन मरीज दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कर गए हैं।

जीएनडीएच में पहले से एक आइसोलेशन वार्ड बनी हुई है और एक ओर तैयार होने जा रही है। इसमें 3 वेंटीलेटर का प्रबंध होगा, जोकि जनरेटर से अटैच होंगे।

डॉ. एनएस नेकी को आइसोलेटेड वार्ड का इंचार्ज बनाया गया है। इसके अलावा 3 पीजी, 8 असिस्टेंट प्रोफेसर, 20 सीनियर रेजीडेंट की ड्यूटी लगाई गई है। इस मौके पर मैडिकल सुपरिटेंडेंट डा. सुजाता शर्मा, प्रिंसिपल डॉ. संतोख सिंह, डीएमएस डॉ. आरके शर्मा, डॉ. सिंगला, डॉ. हरजीत सिंह, मंत्री के ओएसडी डॉ. योगेश अरोड़ा, रवि मोदी, राकेश भारद्वाज, राकेश मिंटू, विशाल लखनपाल आदि मौजूद थे।