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प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने महिलाओं के अश्लील चित्रण पर जताई कड़ी आपत्ति
समाजसेविका प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर विज्ञापनों में महिलाओं का अश्लील चित्रण पेश करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि भारत का सूचना प्रसारण विभाग आपके पास है। पूरे देश में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की चर्चा होती है, पर कोई यह नहीं देखता कि महिलाओं को विज्ञापनों में एक वस्तु के रूप में चित्रित किया जाता है और वस्तु भी वह जिसका अश्लील चित्रण होता है। जिन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और सुषमा स्वराज सूचना प्रसारण मंत्री थीं, तब भी बार-बार यह विषय हमने उठाया था कि विज्ञापनों पर नियंत्रण करे सरकार और देश की बेटियों का अपमान रोकें। जब किसी महिला की इज्जत लुटती है तब देश के सभी नेता और संसद भी इस पर चिंता प्रकट करती है। यह चिंता शब्दों की है या मन की, नेता लोग ही जानते होंगे, पर जिस देश के टेलीविजन चैनलों और अखबारों में महिलाओं का अत्यंत अपमानजनक ढंग से चित्रण होता है उन्हें केवल बाजारू वस्तु बना दिया जाता है। उनके शरीर के नब्बे प्रतिशत अंग ही नहीं बिना कपड़ों के होते, अपितु हाव-भाव भी कामुकता उबारने वाले दिखाए जाते हैं। वहां महिलाओं के सम्मान के लिए केवल वक्तव्य काम नहीं कर सकते जहां कामुकता को भड़काने वाले चित्र, चरित्र दिखाए जाते हैं उस समाज में महिलाएं सुरक्षित कैसे रह सकती हैं। आश्चर्य है कि भारत की एक लड़की को यह कहकर चित्रित किया जाता है यह दुनिया की सर्वाधिक सेक्सी लड़की है।
मेरा निवेदन है कि विज्ञापनों पर नियंत्रण करें और महिलाओं का यह अपमान बंद करें। जो व्यापारिक और औद्योगिक घराने के विज्ञापनों में महिलाओं को अश्लील ढंग से प्रस्तुत करते हैं, उन पर नियंत्रण किया जाए। देश का कानून भी महिलाओं की अश्लील छवि चित्रित करने वाले विज्ञापनों की आज्ञा नहीं देता। ऐसे लोगों के लिए तो कानून में दंड का प्रावधान है।