पानी में कब िघर गए, पता ही नहीं चला
एकतरफ तो जम्मू-कश्मीर में आई भयानक बाढ़ में फंसे लोगों का कुछ स्थानीय लोग सरेआम आर्थिक शोषण कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर पहलगाम स्थित रेस्टोरेंट दाना-पानी के मालिक नरिंदर सिंह मुसीबत में फंसे लोगों को एक टाइम का खाना मुफ्त में मुहैया करवा रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के दौरान श्रीनगर के पहलगाम स्थित रेस्टोरेंट दाना-पानी में ठहरे अमृतसर के कंबलों का व्यापार करने वाले दीपक मेहरा ने बताया वह एक सितंबर को अपनी प|ी के साथ श्रीनगर में दोपहर एक बजे के करीब पहुंचे और दुनिया का स्वर्ग कहलाने वाले इलाके में खूबसूरत वादियों और बागों का आनंद ले रहे थे। इसी दौरान बारिश शुरू हुई आैर उसने धीरे-धीरे अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। घाटी से निकलने वाली झील शेषनाग का जल स्तर भी चार सितंबर को बढ़ना शुरू हो गया और पता ही नहीं चला कि कब पानी ने हमें घेर लिया।
पांच तारीख को सोचा कि वापस चले जाएं, लेकिन सुना कि हर तरफ श्रीनगर को पहलगाम से जोड़ने वाले अनंतनाग, बीज बिहारा और अवंतिपोरा सभी मार्ग पूरी तरह से डूब चुके हैं।
उनका कहना है कि लोगों को राहत दिलाने में सेना का रोल सराहनीय रहा है। िबजली होने के कारण जनरेटर के सहारे डिश टीवी पर खबरें सुनकर हालात की जानकारी मिल जाती थी।
एसजपीसी की टिकट पर श्रीनगर से लौटे लोग
जेएंडकेमें आई बाढ़ के कारण फंसे लोगों को सेना, सरकार और एसजीपीसी की तरफ से सुरक्षित लाने का सिलसिला जारी है। इस कड़ी के तहत मंगलवार को एसजीपीसी की पहल पर श्री गुरु रामदास इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रास्ते 29 लोग सकुशल लौटे।