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कच्चे घर में सजाकर रखेगी खुशबीर एशियन गेम्स का सिल्वर मेडल

7 वर्ष पहले
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मेहतारोड पर छोटे से गांव निक्के रसूलपुर के कच्चे घर में रहने वाली खुशबीर कौर एशियाई खेलों की 20 किलोमीटर पैदल चाल में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला बन गई। जिसने नए नेशनल रिकॉर्ड के साथ यह कारनामा किया।

अमृतसर की 21 वर्षीय खुशबीर ने एक घंटे और 33 मिनट में 20 किलोमीटर वाक कर सिल्वर मेडल अपने खाते में डाला। देश का नाम ऊंचा करने वाली खुशबीर और उसके परिवार ने कई रातें खाली पेट सो कर काटी हैं। बारिश में छत टपकने के कारण प्लास्टिक शीट बिछाकर रहना पड़ता है।

वर्ष 2000 में पिता बलकार सिंह का साया सिर से उठ जाने के बाद खुशबीर ने अपने परिवार का बोझ अपने कंधों पर ले लिया। उसकी मां जसबीर कौर को तो यह भी पता नहीं होता कि वह अपने परिवार को रात को खाना दे भी पाएगी के नहीं। जसबीर ने बताया कि पहले ओएनजीसी उन्हें 25 हजार रुपए भत्ते के रूप में देता था, लेकिन वे बंद हो चुके हैं।

एकसाल से है मसल पुल की शिकायत

हैरानकरने योग्य बात है कि खुशबीर ने यह खिताब मसल पुल होने के बावजूद जीता। जसबीर ने बताया कि साल पहले खुशी का बैंगलोर में कैंप के दौरान मसल पुल हो गया था। इस घटना को एक साल हो चुका है लेकिन तकलीफ बढ़ती जा रही है। वाक से पहले वह अपनी टांग पर पट्टी कर ट्रैक पर उतरती है। वह यह खुशी शब्दो मेंं बयां नहीं कर सकती।

सरकारी स्कूल में पढ़ी

खुशीने दसवीं तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। सरकारी स्कूल अकालगढ़ टपई में सातवीं कक्षा में पढ़ते पहली बार उसने स्कूल गेम्स में भाग लिया। जिला खेलों में बिना प्रेक्टिस उसने गोल्ड जीता। इसके बाद फुटबॉल कोच बलविंदर कौर ने उसे वाक की ट्रेनिंग देनी शुरू की। अब वह खालसा कॉलेज फॉर वूमन से पीजीडीसीए कर रही है और अपने खेल को निखार भी रही है।

मां बोली, अगर इलाज होता तो गोल्ड लाती

मांजसबीर कौर ने कहा कि उसकी बेटी का नेशनल रिकार्ड 1 घंटा 31 मिनट का है। एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली लड़की ने 1.31 घंटे में वाक पूरी की। अगर खुशी को मसल पुल की शिकायत होती तो वह गोल्ड लाती।