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पीए-457 मिले तो एड्स का इलाज भारत में भी संभव
देशमेंजड़ी-बूटियों की भरमार है। अगर देश के शोधकर्ता पूरी सक्रियता से भारतीय जड़ी-बूटियों से पीए-457 आईसोलेट करने में सफल हो जाएं तो एड्स का इलाज भारत में भी संभव हो जाएगा। इससे एड्स ही नहीं वायरस के कारण होने वाली अन्य बीमारियों की रोकथाम में भी मदद मिल पाएगी। यह कहना है नवांशहर में आयोजित की गई राज्य स्तर की साइंस प्रदर्शनी इंस्पायर्ड अवार्ड एग्जिबीशन में फर्स्ट रहने वाले डीएवी इंटरनेशनल स्कूल के स्टूडेंट हरजोत सिंह और टीचर एमके भाटिया का।
एड्सवायरस को एक्टिव नहीं होने देती पीए-457 : शरीरके अंदर पनपने वाले वायरस के अंदर गैग प्रोटीन पाया जाता है। गैग प्रोटीन का एक हिस्सा, जिसे कैपसिड प्रोटीन कहते हैं, अलग होकर खून में पाए जाने वाले आरएनए के चारों ओर कैपसिड लेयर तैयार कर देता है। जिसके बाद हमारे शरीर में एड्स वायरस सक्रिय हो जाता है। लेकिन पीए-457 इस गैग प्रोटीन के कैपसिड प्रोटीन के साथ चिपक जाता है और उसे अलग नहीं होने देता। जिसके बाद आरएनए के बाहर कैपसिड लेयर तैयार नहीं हो पाती और वायरस सक्रिय नहीं हो पाता।
इससे एड्स जैसी भयानक बीमारी से बचा जा सकता है।
शोध करने की है जरूरत
टीचरभाटिया ने बताया कि यह शोध पहले ताइवानी हर्ब से शुरू हुआ, लेकिन इसके बाद यही पीए-457 तत्व बर्च ट्री से आईसोलेट किया गया। बर्च ट्री से तैयार होने वाले पीए-457 की मात्रा बहुत कम है और इससे बड़ी संख्या में इलाज कर पाना संभव नहीं है। भारत के शोधकर्ताओं को चाहिए कि वे आयुर्वेद पर आधारित रिसर्च शुरू कर जड़ी-बूटियों से इस तत्व को तैयार करे।
मॉडल के साथ डीएवी इंटरनेशनल का हरजोत सिंह।