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बेटे को अफसर बनाना चाहता था बब्बा

7 वर्ष पहले
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शरीफपुराइलाके में जन्मे संजीव कुमार नैय्यर उर्फ बब्बा के नाम के साथ भले ही गैंगस्टर शब्द जुड़ गया था, लेकिन वह अपनी असल जिंदगी में अलग इंसान था।

भले ही उसके खिलाफ विभिन्न थानों में दर्जनों केस दर्ज हैं, जिनमें मारपीट, हत्या और हत्या प्रयास के केस शामिल हैं। लेकिन बब्बा के करीबी, रिश्तेदार और दोस्तों के मुताबिक वह खुशदिल इंसान था। लोग उसकी जिंदादिली के कायल हो जाते थे।

बब्बा के पिता भूषण लाल प्राइवेट नौकरी करते थे, लेकिन बहुत साल पहले उनकी मौत हो गई। मां कांता देवी सरकारी टीचर थीं, जो रिटायर हो चुकी हैं। बब्बा के बड़े भाई गोल्डी की पहले ही मौत हो चुकी है। छोटा भाई रिंकू अपना खुद का व्यापार करता है। बब्बा स्वयं ग्रेजुएट था और काॅलेज टाइम पर किक्रेट टीम का अच्छा खिलाड़ी रह चुका है। उसके साथ पढऩे वाले कई सहपाठी पुलिस विभाग में उच्च पदों पर तैनात है। लेकिन जब बब्बा अपराध के रास्ते पर चला तो उसकी चढ़त देखते हुए बहुत सारे राजनेताओं की नजर पढ़ी और नेताओं ने खुद का वोट बैंक मजबूत करने के लिए बब्बा को अपनी शरण देनी शुरु कर दी है। यही कारण है कि वह बेखौफ होकर अपने काम करने लग पड़ा।

राजूचिकना की हत्या करने पर हुई थी सजा

बब्बाने अपनी एक गैंग बना रखी थी। बब्बा गैंग और चिकना गैंग के बीच रंजिश थी। चिकना गैंग का मुखिया राजू चिकना और बब्बा के बीज कई बार टकराव हो चुका था। जनवरी 2010 में राजू चिकना अदालत में पेशी पर आया था। इस बात की भनक बब्बा और लिखारी गैंग को लग गई। दोनों ही गैंग के सदस्य मौका पाकर कचहरी पहुंच गए और राजू चिकना की गोलियां मार कर हत्या कर दी। दोषी पाए जाने पर बब्बा और लिखारी को उम्रकैद की सजा हुई थी।

बेटे और प|ी को रखा था अपनी दुनिया से अलग

बब्बाका 16 साल का बेटे वैभव और प|ी मोनिका पर उसकी गैंगस्टर जिंदगी का कोई प्रभाव पड़े। इसके लिए उन्हें अलग रखा हुआ था। बब्बा प|ी और बेटे को लेकर बहुत साल पहले दिल्ली शिफ्ट हो गया था और वह बेटे को उच्च शिक्षा हासिल करवा रहा था। ताकि वह कोई बड़ा अधिकारी बन सके।

विलाप| बब्बाके संस्कार के वक्त उसकी प|ी मोनिका, बेटे वैभव और अन्य रिश्तेदारों का रो-रो कर बुरा हाल था।