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अमृतसर का एक गांव जहां रोज लगता है कर्फ्यू

7 वर्ष पहले
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1971 की जंग जीतने के बाद भी एक साल पाक के कब्जे में रहा था

शिवराजद्रुपद | मुल्ला कोट/अमृतसर

भारत-पाकबाॅर्डरपर 500 गज के दायरे में बसे गांव मुल्ला कोट में रोज शाम को कर्फ्यू लग जाता है। यह वही महीना है जब 43 साल पहले 1971 में पड़ोसी मुल्क ने हमला कर इस गांव को अपने कब्जे में लिया था। जंग तो 13 दिन में समाप्त हो गई, लेकिन यह गांव पूरे एक साल तक पाक के कब्जे में रहा।

घरगिराकर ईंट तक ले गए पाकिस्तानी : गांवकी वयोवृद्ध महिला नरिंदर कौर कहती हैं कि गांव में 45 घर हुआ करते थे। हमला तीन दिसंबर की रात को हुआ था अौर भारतीय सेना ने 16 दिसंबर को जंग जीत ली। वह लोग घर, जेवर और अन्य सामान छोड़ भाग गए थे। उस भागमभाग में कई बुजुर्ग और बच्चे मर भी गए थे। पंचायत मैंबर सुरजीत सिंह का कहना है कि हमारी फौज जीत गई, लेकिन मुल्ला कोट एक साल बाद वापस मिला। गांव लौटे तो घर के नाम पर सिर्फ मलबा पड़ा था। दीवारें और छत गिरा कर ईंटें, रसोई के बर्तन और जेवरात भी लुट गए थे।

पंचायत मैंबर जसबीर सिंह ने बताया कि उस वक्त गांव में 45 घर हुआ करते थे। सभी पलायन कर गए थे, वापस सिर्फ कुछ परिवार लौटे और उनसे इस वक्त यहां पर 20 परिवार आबाद हैं। बार्डर पर बसे होने के कारण यहां पर लोग अपनी बेटियों की शादी तक करना गवारा नहीं समझते। उन्होंने बताया कि युवाओं की शिक्षा और रोजगार के भी साधन नहीं हैं।

नरिंदर कौर, पंचायत मैंबर सुरजीत सिंह, जसबीर सिंह ने कई बातें सांझा की।