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अमृतसर की शाॅल इंडस्ट्री को दिख रहा है पाक में व्यापारिक भविष्य
अमृतसरकी शॉल इंडस्ट्री ने पिछले दस सालों में काफी तरक्की की है। अक्टूबर 2002 में अमृतसर में सबसे पहले अपोलो वुलेन ने दो शटल लेस लूम (विद इलेक्ट्रॉनिक जेकार्ड) मंगवाई थी, अब शॉल इंडस्ट्री में 500 के करीब ऐसी लूम्स हैं। शहर की इंडस्ट्री की सालाना टर्न ओवर 600 करोड़ है।
पाकिस्तान को वाया दुबई और कश्मीर के टैक्स फ्री रूट से अवैध तरीके से शालें एक्सपोर्ट हो रही हैं, यदि शाॅल के पाजीटिव लिस्ट में आने के बाद आईसीपी अटारी के माध्यम से डायरेक्ट एक्सपोर्ट शुरू हो जाए तो 100 करोड़ का कारोबार बढ़ सकता है।
वहीं इस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों ने केंद्र सरकार से प्रगति मैदान नई दिल्ली की तर्ज पर ट्रेड एंड एग्जीबिशन सेंटर खोले जाने की भी मांग है। वहीं मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल से पंजाब में इंडस्ट्री को दूसरे राज्यों के मुकाबले राहत देने की अपील की है।
पट्टी-मक्खू रेल लिंक शुरु हो
^पट्टी-मक्खू रेल लिंक शुरू होने से मुंबई का सफर 230 कि.मी. कम होगा और फ्रेट भी घटने से इंडस्ट्री को फायदा पहुंचेगा। क्रूड रेट 132 डालर से घटकर 60 डालर हो गया है, लेकिन निजी कंपनी की मनोपली के कारण पॉलिस्टर यार्न के काम उसके मुताबिक नहीं घटाए गए। रॉ मेटीरियल सस्ता हो जाए तो चाइना से मुकाबला करना आसान हो जाएगा। -प्यारालाल सेठ, महासचिवशॉल क्लब आफ इंडिया
{ यार्नपर वैट 6.05 फीसदी है, जबकि यूपी में वैट नहीं है और हिमाचल में करीब 1.5 फीसदी वैट है।
{उद्यमीबिजली खपत के तहत 8 रुपए इंडस्ट्रियल यूनिट भर रहे हैं, वहीं हिमाचल और जेएंडके में करीब 5 रुपए प्रति यूनिट है।
{शहरमें आधुनिक लूमों को ठीक करने के लिए दो ही इंजीनियर है, यदि कोई मशीन खराब हो जाए तो 15 से 30 दिन बाद ही ठीक हो पाती है।
{लेबरशार्टेज से भी इंडस्ट्री प्रभावित हो रही है।
{छेहर्टास्थित पंजाब इंस्टीच्युट आफ टैक्सटाइल टेक्नोलॉजी (पिट्ट) में अभी भी मैन्युअल मशीनों पर ट्रेनिंग दी जाती है,वहीं टीचर और इंफ्रास्ट्रक्टर अपडेट नहीं हो पाए हैं।