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इस रिश्ते को कोई नाम तो दो...

7 वर्ष पहले
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विरसा विहार में फेस्ट के छठे दिन पेश हुआ नाटक मे बी दिस समर

भास्करन्यूज| अमृतसर

विरसाविहार में चल रहे 12वें नेशनल थिएटर फेस्टिवल के छठे दिन वीरवार को दिल्ली के थिएटर ग्रुप लाबोनी परफार्मिंग आर्ट्स की तरफ से हिंदी नाटक मे बी दिस समर का मंचन किया गया। लिविंग रिलेशनशिप पर आधारित इस नाटक को लिखा त्रिपुरारी शर्मा ने और निर्देशित किया है टीकम जोशी, गौरी देवल और त्रिपुरारी शर्मा ने।

कुंवारों की जुबानी उन्हीं की कहानी : नाटक का तानाबाना एक युवा जोड़े के इर्दगिर्द बुना गया है। लड़का और लड़की बिना शादी किए एक साथ रहते हैं। सामाजिक मान्यता के विपरीत यह लोग पति-प|ी की तरह रहते हैं। कुछ दिन गुजरने के बाद लड़की लड़के से शादी करने को कहती है। लड़का शादी करने से इंकार करता है और कहता है कि इस तरह से रहने में क्या बुराई है। लड़की कहती है कि बुराई तो नहीं है मगर समाज के मुताबिक इस रिश्ते को कोई नाम तो दिया जाना चाहिए।

इसी द्वंद्व को लेकर पूरी कहानी चलती है। नाटक में इस एक रिश्ते के जरिए समाज में और रिश्तों पर भी फोकस किया गया है। कहानी समाज में रिश्तों को ओढ़ने की प्रवृत्ति और असल में रिश्ते निभाने के अटल विश्वास पर भी चर्चा होती है। गौरी देवल कहती हैं कि रिश्ता वही जो मान्यताओं के मुताबिक निभाया जाए और उसका समाज पर सकारात्मक असर पड़े। नाटक में टीकम जोशी तथा गौरी देवल ने किरदार निभाया है।