नौकरी नीं देणी सी, लारा क्याें लाया
आपके भरोसे के बाद भी कोई पहुंचा हाल जानने
सीएम साहब! ये है हकीकत
मैंइस समयअस्पताल में हूं। बिस्तर पर पर लेट पाना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है। जले हुए शरीर के साथ मैं बर्दाश्त हो सकने वाली तकलीफ से गुजर रही हूं। डॉक्टर कहते हैं मैं 35 फीसदी जली हूं। पर सच ये नहीं है। मैं 35 फीसदी जले हुए शरीर और हजार फीसदी जले हुए मन के साथ इस बिस्तर तक पहुंची हूं। और ये सब हुआ है हमारे पंजाब के सीएम और उनके अमले की मेहरबानी से। मैंने अपने आपको आग तो खुद लगाई लेकिन मुझे इस हालत तक पहुंचाने वाले ये ही लोग थे। बीस साल से अनाथ हूं। पहले गीता भवन गुरदासपुर में रहती थी अब 17 साल से हरमंदिर साहब अमृतसर में रह रही हूं। इस सब को अपना भाग्य मानकर मैंने समझौता कर लिया। मैंने मान लिया था कि रब ने मेरे लिए यही लिखा है। ये सब शायद ऐसे ही चलता रहता अगर मैंने 6 साल पहले अमृतसर के संगत दर्शन में बड़े बादल साहब को देखा होता। उन्हें देखकर मुझे लगा कि रब ने मेरे लिए कुछ अच्छा सोचकर ही उनसे मिलवाया है। मैंने उनसे कहा-साहब अनाथ हूं कहीं नौकरी लगवा दो। उन्होंने पूछा-आप कितना पढ़े हो ? तो मैंने बताया कि मैं 12वीं तक पढ़ी हूं। इस बाद बादल साहब ने कहा कि आप कंप्यूटर कोर्स कर लो।उनके कहने पर मैंने दो साल का कंप्यूटर कोर्स भी कर लिया। ये सब हुए भी अब चार साल हो चुके हैं। इन चार साल में मैं 4 बार बड़े बादल और 3 बार छोटे बादल साहब को मिली। मैंने उन्हें हर बार बताया कि आपके कहने पर ही मैंने कंप्यूटर कोर्स किया है अब तो मेरी नौकरी लगवा दो। हर बार बादल साहब अपने पीए को मेरे लिए कुछ करने की बात कहकर चले गए। मैंने जब पीए से बात की तो उसने मुझे आगे किसी और का नंबर दे दिया। मैं 14 लोगों से मिली। 27 बार मुझसे नौकरी की एप्लीकेशन ही लिखवा ली गई। ये सब हुआ पर नौकरी नहीं मिली।
चार दिन पहले मैं ये सोचकर चंडीगढ़ आई कि एक बार फिर से मिलकर सीएम साहब को इस बारे में बताऊंगी। मैं यहां चंडीगढ़ के गुरद्वारे में रह रही थी। मैं रोज सीएम साहब की कोठी पर जा रही थी। पर सिक्योरिटी वाले मुझे उनसे मिलने नहीं दे रहे थे। यहां तक कि मुझे उस पीए से भी मिलने नहीं दिया जा रहा था जिसने मुझे इतने चक्कर में डाला था। शुक्रवार सुबह सवा नौ बजे एक बार फिर मैं सीएम साहब की कोठी पर पहुंची। मैंने वहां मौजूद गार्ड से कहा कि साहब से मिलना है। उसने मना कर दि