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100 साल बाद कामागाटामारू के हीरो गुरदित्त की याद में केंद्र ने जारी किया 100 रुपए का सिक्का

6 वर्ष पहले
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केंद्रसरकारको कामागाटामारू घटना के 100 साल बाद इसके हीरो बाबा गुरदित्त सिंह की याद आई है। केंद्र ने एक समारोह आयोजित कर उनके वंशजों को सम्मानित किया और 100 रुपए का एक सिक्का भी जारी किया। बाबा गुरदित्त की पोती हरभजन कौर ने बताया कि घटना के दौरान उनके पिता बलवंत सिंह दस साल के थे। वे बड़ी मुश्किल से बचे थे। इसके बाद बाबा जी ने बापू के कहने पर ननकाना साहिब में आत्मसमर्पण किया था। उन्हें सात साल की कैद हुई थी। 1952 में कोलकाता में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने बाबा को सम्मानित किया था।

इस घटना पर कनाडा सरकार ने कुछ महीने पहले डाक टिकट जारी किया था। लेकिन, भारत सरकार अब तक इस पर विचार कर रही है। सरकार ने गुरदित्त के परिवार को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही डाक टिकट जारी होगा।

हरभजन कौर के पति एडवोकेट तरलोचन सिंह विर्क ने बताया कि 29 सितंबर को दिल्ली में उनके परिवार को खास रूप से बुलाया गया था। हरभजन की बहनें सतवंत कौर और बलबीर कौर भी गई थीं। सभी को सम्मानित किया गया। केंद्र ने तो अपना फर्ज निभा लिया लेकिन पंजाब सरकार अब भी सोई हुई है। विर्क ने बताया कि शताब्दी मनाने के लिए केंद्र ने 14 मेंबरी कमेटी गठित की है।

बाबा गुरदित्त सिंह

कामागाटामारू एक समुद्री जहाज था, जिसे हांगकांग में रहने वाले बाबा गुरदित्त सिंह ने खरीदा था। जहाज में 376 लोगों को बैठाकर बाबा 4 मार्च 1914 को वेंकूवर के लिए रवाना हुए। 23 मई को वहां पहुंचे लेकिन, अंग्रेजों ने सिर्फ 24 को उतारा और बाकी को वापस भेज दिया। जहाज कोलकाता के बजबज घाट पर पहुंचा तो 27 सितंबर 1914 को अंग्रेजों ने फायरिंग कर दी। इसमें 19 लोगों की मौके पर मौत हो गई। इस घटना ने आजादी की लहर को और तेज कर दिया था।

कोलकाता में हुई थी फायरि ंग

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