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- \"जब हमसे फीस ले रहे हैं पूरी तो फिर सुविधा क्यों मिल रही अधूरी\'
\"जब हमसे फीस ले रहे हैं पूरी तो फिर सुविधा क्यों मिल रही अधूरी\'
अगरसरकार सुविधा सेंटर में आने वाले लोगों से काम के बदले पूरी फीस ले रही है तो पूरी सुविधाएं भी मुहैया करवाए। डेढ़ घंटे से हम गर्मी में खड़े हैं लेकिन तो कंप्यूटर चल रहे हैं और ही पंखे। उमस और गर्मी में एक मिनट भी लाइन में खड़ा होना मुश्किल है। मंगलवार को डीटीओ सुविधा सेंटर में अपने-अपने काम करवाने के लिए लाइनों में लगे लोग विभाग की कारगुजारी को कोसते नजर आए। असल में सुबह जैसे ही सुविधा सेंटर खुला, कुछ देर काम के बाद अचानक बिजली बंद हो गई। पंखों के साथ-साथ एकाएक कंप्यूटर भी बंद हो गए। उस समय सुविधा सेंटर में 100 से अधिक लोग माैजूद थे।
क्याऐसी होती है सुविधा
कटड़ाशेर सिंह के रहने वाले विजय शक्ति अपने बेटे और बेटी के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करने आए थे। गर्मी से परेशान विजय का कहना था कि वह दुकान का काम छोड़कर आए हैं लेकिन यहां खड़े-खड़े दो घंटे हो गए हैं, अब तक बारी नहीं आई। डेढ़ घंटे से बिजली सप्लाई बंद है। क्या सरकार लोगों को ऐसी सुविधा मुहैया करवा रही है।
कभीसुधार नहीं हो सकता
स्टेटबैंक ऑफ इंडिया के रिटायर्ड अधिकारी बलवंत सिंह अपनी बेटी का लाइसेंस बनवाने पहुंचे हैं। बेटी स्कूल टीचर है और जब तक वह नहीं पहुंचती, बलवंत सिंह लाइन में खड़े हैं ताकि उसके आने तक उनका नंबर जाए लेकिन कंप्यूटर बंद पड़े होने के कारण उन्हें शायद निराश वापस लौटना पड़ेगा। सिस्टम से खफा बलवंत सिंह कहते हैं इस देश में सुधार नहीं हो सकता।
जालंधरसे आई रमनदीप
रमनदीपकौर हेल्थ डिपार्टमेंट में नौकरी करती हैं। लाइसेंस बनवाने के लिए वह छुट्टी लेकर जालंधर से आई हैं। रमनदीप का कहना था कि उसका लर्निंग लाइसेंस बन चुका है और वह पक्का लाइसेंस बनवाने के लिए अप्लाई करने आई हैं लेकिन डेढ़ घंटे से बिजली होने के कारण सारा काम बंद पड़ा है।
दोघंटे से लाइन में खड़ी हूं
बीकाॅमकी स्टूडेंट परमीत कौर अपना लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए काॅलेज से छुट्टी लेकर आई है, लेकिन लाइन में खड़े दो घंटे हो गए है, अभी तक बारी नहीं आई। बिजली बंद होने के कारण कंप्यूटर काम नहीं कर रहे।
सोमवारको भी निराश लौटा
गांवचब्बा के बलवंत सिंह का कहना था कि सुविधा सेंटर बस नाम का है जबकि यहां बैठने की सुविधा है और हवा या पानी की। सोमवार भी सारा दिन लाइट का पंगा रहा। आज भी काम पूरा होने के आसार नजर नहीं आते।
जल्द