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बंगाल की मिट्टी से अमृतसर में तैयार होती हैं दुर्गा की मूर्तियां
कलाकार शिव कुमार के मुताबिक वे लोग यहां पर जून महीने में आते हैं और लोगों को मूर्तियां उपलब्ध कराते हैं। फिर दीवाली के बाद वापस अपने गांव चले जाते हैं।
शिवराज द्रुपद | अमृतसर
पंजाबके विभिन्न शहरों में मनाए जाने वाले दुर्गापूजा पर्व के लिए बंगाली कलाकारों ने मूर्तियां बनानी शुरू कर दी हैं। इसमें पश्चिम बंगाल से मंगाई गई मिट्टी इस्तेमाल की जा रही है।
5महीने करते हैं प्रवास
यहांबंगाली बस्ती में पूरे जिले के लिए मूर्तियां तैयार करने वाले पश्चिम बंगाल के कारीगर शिव कुमार पाल ने बताया कि दशकों से वह यहां पर आते हैं और काम निपटा कर चले जाते हैं। पाल के मुताबिक वे लोग यहां पर जून महीने में आते हैं और लोगों के आॅर्डर के मुताबिक मूर्तियां उपलब्ध कराते हैं फिर दीवाली के बाद वापस अपने गांव चले जाते हैं। पाल ने बताया कि जिस तरीके से वह अमृतसर में मूर्तियां तैयार करते हैं उसी तरह से उनके लोग जालंधर, लुधियाना, पटियाला आदि शहरों में भी इस काम को अंजाम देते हैं। पाल के साथ काम करने वाले कारीगर गोपाल का कहना है कि पंजाब में दुर्गा पूजा का चलने तेजी से पनप रहा है। पहले बंगाल के लोग ही इसमें हिस्सा लेते थे, मगर अब यहां के भी शामिल होने लगे हैं।
कुछखास है ये मिट्टी
यहांचार कारीगरों को लेकर काम कर रहे पाल का कहना है कि बंगाल में माता की मिट्टी से जो भी मूर्ति बनाई जाती है उसमें सोना गाछी (रेड लाइट एरिया) की मिट्टी जरूर मिलाई जाती है, यह बंगाल की परंपरा है।
इस बाबत उनका कहना है कि ऐसी मान्यता है कि हर औरत मां का स्वरूप है, अगर वह भटकी है तो समाज की गलतियों के कारण। एक अन्य कारीगर माणिक ने बताया कि मूर्ति में सोना गाछी जैसे बदनाम इलाके की मिट्टी मिलाने का मतलब नारी को सम्मान देना है। यहां पर वह लोग बोरी में भर कर मिट्टी लाते हैं। जब मूर्ति बनानी होती है तो यहां की मिट्टी में उसका कुछ हिस्सा मिला दिया जाता है।
इनमूर्तियों की तैयारी
पालने बताया कि दुर्गापूजा के लिए वे लोग दुर्गा मां, उनकी सवारी शेर, महिषासुर, पार्वती, सरस्वती, गणेश जी, कार्तिकेय की मूर्तियां तैयार कर रहे हैंं। अब यहां पर विश्व कर्मा पूजा के लिए भी मिट्टी की मूर्तियां तैयार की जाने लगी हैं।