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पंजाबियत के रंग में रंगे आदिवासी युवा

5 वर्ष पहले
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विरसाविहार में चल रहे आठवें आदिवासी युवा आदान-प्रदान प्रोग्राम में मंगलवार को आदिवासी युवा और युवतियां पंजाबी कल्चर में पूरी तरह से रंगे नजर आए। इन लोगों ने अपने कल्चर्ल आइटम पेश करके लोगों को मुग्ध तो किया ही बल्कि गिद्दा और भंगड़े में भी खूब थिरके। विकास से कोसों दूर माओवादी तथा नक्सली इलाकों के इन प्रतिभागियों ने बताया कि वह प्रोग्राम की मीठी यादों को साथ ले जाएं। समागम के मुख्य मेहमान सीआरपीएफ के डीआईजी सुनील थोरपे ने कहा कि ऐसे प्रोग्राम देश को जोड़ते हैं।

चार राज्यों के युवा ले रहे हिस्सा : नेहरू युवा केंद्र के जिला को-आर्डीनेटर सैमसन मसीह ने बताया कि पांच से 12 फरवरी तक चलने वाले इस प्रोग्राम में पंजाब के अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड तथा उड़ीसा के नक्सल तथा माओवाद प्रभावित इलाकों के 250 बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। इसका मुख्य मकसद उनको देश की विविधता बारे बताना, उनमें देश प्रेम की भावना पैदा करके उन्हें मुख्य धारा में लाना है। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रोग्राम की जिम्मेदारी गृहमंत्रालय, नेहरू युवा केंद्र, खेल मंत्रालय, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी एसएसबी को संयुक्त रूप से दी गई है।

युवा देश की रीढ़ : डीआईजी ने प्रोग्राम की तारीफ की और कहा कि इस तरह के प्रोग्राम देश को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य और रीढ़ की हड्डी होते हैं। उनको तरक्की की राह पर लाना और उनमें राष्ट्रीयता की भावना पैदा करना हमारी सब की जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. सरवन जीत सिंह ने कहा कि समाज देश के सृजन में युवकों की भूमिका अहम है। इस मौके पर सुरिंदर सिंह, संदीप कौर, रोबिनजीत सिंह, अनिल, सुनील, सतनाम सिंह, प्रितपाल सिंह, पीटर मसीह, जगतार सिंह, रमनदीप कौर, हरविंदर कौर, मनप्रीत कौर, गुरमनप्रीत कौर आदि मौजूद थे।

प्रोग्राम के दौरान सीआरपीएफ के डीआईजी सुनील थारपे और नेहरु युवा केंद्र के को-आर्डिनेटर सैमसन मसीह पंजाब, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के बच्चों के साथ।

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