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ठुकराल जोड़ी ने घर की छत पर गार्डन बनाकर, हरियाली का दिया पैगाम

8 वर्ष पहले
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अमृतसर। शहर के चारों ओर बनती कंक्रीट की इमारतों के कारण कम होती जगह, घटती हरियाली और बढ़ते प्रदूषण के कारण बागों की महत्ता बहुत अधिक बढ़ गई है। लेकिन अकसर लोग सवाल करते हैं कि कम जगह में रहें या घर में पौधे लगाएं।

उनके लिए उदाहरण हैं छेहर्टा की संधू काॅलोनी सी ब्लाॅक की ठुकराल फैमिली और बटाला रोड के न्यू पवन नगर की बलराम शर्मा फैमिली। जिन्होंने अपने घर के टैरेस पर गार्डन बना कर पौधों की देखभाल शुरू की। जीएनडीयू के एन्वायर्नमेंटल साइंस के प्रोफेसर डॉ. रविंदर ठुकराल और शहजादा नंद कॉलेज में संगीत विभाग की प्रोफेसर हीरा ठुकराल के दिन की शुरुआत टैरेस पर बनाए गार्डन में टहलने से होती है। उन्होंने बताया कि साल 2010 में जब उन्होंने जहां मकान बनाना शुरू किया तो वहां कहीं पार्क नहीं था। इसलिए उन्होंने अपने आर्किटेक्चर को मकान के टैरेस में 30 से 40 फीट का गार्डन बनाने की बात कही और आर्किटेक्चर ने इसे तैयार किया।

फर्शपर घास से लेकर सलेशिया तक के पेड़ लगे

ठुकराल फैमिली ने टैरेस पर बने गार्डन के फर्श पर हरी घास लगाई है। इसके अलावा मधुमालती, रोज, एरोकेलिया, बोगनीविला, डेलिया, कारेशियम, गुलदाउदी, सलेशिया, शॉवर, फर्न और वर्ल्ड पैराडाइज के अलावा कई तरह के पौधे लगाए हैं। जिसकी देखभाल के लिए अनंतराम माली को रखा है।

मजीठा रोड न्यू पवन नगर में पंजाब सुधार सभा के स्टेट प्रधान बलराम कुमार शर्मा और उनकी पत्नी प्रमोद रानी ने अपने टैरेस पर 250 गमलों में कई तरह के पेड़, पौधे और फूल लगाए हैं। बलराम शर्मा का कहना है कि करीब 8 साल पहले उन्हें गमले रखने का शौक पड़ा। अब वह इतना बढ़ गया है कि घर के बाहर से लेकर टैरेस पर रखे गमलों में कई तरह के पेड़-पौधे और फूल लगाए हैं। उन्होंने बताया कि घर में लगाई रात की रानी और चमेली की खुशबू से पूरा इलाका महकता रहता है।

मैडम हीरा ठुकराल और जीएनडीयू के प्रो. एके ठुकराल, जिन्होंने अपने घर की छत पर टैरेस गार्डन बनाया हुआ, जिसमें अलग-अलग तरह के फूल लगाए हुए हंै।

तीन लाख रुपए में बनाया टैरेस गार्डन

अपने टैरेस पर गार्डन बनाने के लिए तीन लाख रुपए खर्च करके आप भी प्रकृति से जुड़ सकते हैं। इसमें दो से ढाई इंच का लेंटर डालकर चारों और कंक्रीट की दीवारें बनाएं। लेंटर डालते समय इसे वॉटर प्रूफ रखने के लिए विशेष कैमिकल, तारकोल और कीड़ा लगने से बचाने के लिए कैमिकल का इस्तेमाल किया जा सकता है। उसके ऊपर नारियल के छिलके 4 फीट मिट्टी की परत डाली जाती है। इसमें 5 हजार रुपए प्रति स्क्वेयर खर्च करके गार्डन तैयार हो जाता है।