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कई अनूठी परंपराएं सहेजे है अटूट आस्था का केंद्र श्री दुुर्ग्याणा तीर्थ

4 वर्ष पहले
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सामाजिक,व्यापारिक, सामरिक और धार्मिक रूप से समृद्ध अमृतसर विभिन्न धर्मों के तीर्थ स्थलों से भरा पड़ा है। इसी में शुमार है यहां का प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल श्री दुर्ग्याणा तीर्थ। यह स्थान जहां विभिन्न मंदिरों और अन्य प्रकल्पों के रूप में जाना जाता है वहीं सेवा के लिए भी मशहूर है। यहां कई ऐसी परंपराएं संचालित होती हैं जो विश्व प्रसिद्ध हैं।

शीतला मंदिर के नाम से जाने जाने वाले इस तीर्थ में माता शीतला का मंदिर, बड़ा श्री हनुमान मंदिर, शनि मंदिर तथा पावन सरोवर के बीच श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर इसके मुख्य आकर्षण हैं। शीतला माता मंदिर में नवरात्र तो बड़ा श्री हनुमान मंदिर में शारदीय नवरात्रों में लंगूर प्रथा का अनूठी परंपरा का पालन होता है। श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर का निर्माण 1925 में हुआ बताया जाता है, जबकि शीलता मंदिर तथा बड़ा श्री हनुमान मंदिर पुरातन हैं। सोने से मढ़ा सरोवर का मंदिर देखते ही बनता है। वैदिक कथा के मुताबिक भगवान राम ने जब माता सीता को वनवास दिया तो वह श्री रामतीर्थ स्थित भगवान वाल्मीकि आश्रम में आकर रुकी थीं। यहीं पर लव और कुश का जन्म हुआ था। जब श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ किया तो उनके द्वारा छोड़ा गया घोड़ा यहां पहुंचा था और लव-कुश ने उसे पकड़ कर वट वृक्ष से बांधा था। माना जाता है कि हनुमान मंदिर में जो वट वृक्ष है यह उसी पुरातन पेड़ का अंश है।

रंग-बिरंगी रोशनी में नहाया श्री दुर्ग्याणा तीर्थ का मनमोहक नजारा।

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