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सरहदी किसान सरकार पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट डालने की तैयारी में

5 वर्ष पहले
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अमृतसर। आतंकवाद के दौरान पाकिस्तान से लगती पंजाब की सरहद पर फेंसिंग में फंसी खेती लायक जमीन को लेकर किसान राज्य तथा केंद्र सरकार के खिलाफ कंटेम्ट ऑफ कोर्ट डालने की तैयारी में हैं। किसानों का कहना है कि दो दशक से ज्यादा वक्त गुजर गया और अदालतों ने उनके हक में फैसले सुनाया मगर न तो उन्हें सही तरीके से मुआवजा दिया गया और ना ही अन्य किसी तरह की मदद की।
पंजाब दौरे पर पहुंची केंद्रीय होम अफेयर्स की पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष पीड़ित किसानों ने खुल कर चुनौती दी और कहा कि उनके सब्र का प्याला भर चुका है। कमेटी पंजाब के बाॅर्डर बेल्ट के किसानों, बीएसएफ के जवानों तथा आंतरिक सुरक्षा का जायजा लेने के लिए पहुंची थी। इसके तहत शुक्रवार को किसानों के साथ मीटिंग भी हुई। किसानों ने अपना पक्ष और मुश्किलें पेश कीं। कमेटी ने उनको भरोसा भी दिया, मगर वह संतुष्ट नजर नहीं आए। पंजाब बाॅर्डर एरिया किसान वेलफेयर सोसायटी के प्रधान रघबीर सिंह भंगाला की अगुअाई में पहुंचे किसानों ने तर्क दिया कि कमेटियां आती हैं रिपोर्ट बनाती हैं मगर नतीजा कुछ नहीं निकलता।
सुरक्षा के अलावा सरहदी जन-जीवन के मामले में पंजाब सरकार फेल : भट्टाचार्य
पाकिस्तान से लगते पाकिस्तान के बार्डर की सुरक्षा की खामियां, बीएसएफ जवानों तथा किसानों की मुश्किलें का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय होम अफेयर्स की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी बार्डर मैनेजमेंट में राज्य सरकार की कारगुजारी से खुश नहीं है। तीन दिनों तक पंजाब के विभिन्न बार्डरों पर जाकर कमेटी मेंबरों ने हर पहलू को बारीकी से जाना और इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। कमेटी के कुछ लोगों का मानना है कि लोकल मुद्दों पर राज्य सरकार फेल रही है।
बाॅर्डर पर बहुत कुछ करने की जरूरत
शुक्रवार को एक होटल में किसानों, बीएसएफ, पंजाब पुलिस और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मीटिंग के बाद पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों ने कहा कि वह लोग सारी स्थिति को सरकार के समक्ष रखेंगे और उसके बाद आगे काम किया जाएगा। हालांकि सुरक्षा कारणों के चलते बाॅर्डर पर पाई गई खामियों को कमेटी ने सार्वजनिक नहीं किया मगर इतना जरूर कहा कि हालात के मद्देनजर बाॅर्डर पर बहुत कुछ किया जाना अभी बाकी है। बॉर्डर पर फेंसिंग का नवीनीकरण, खाली जगहों पर फेंसिंग लगाना। जवानों की नफरी बढ़ाना, सरहदी लोगों को बुनियादी सहूलियतें देना आदि शामिल हैं।
बाॅर्डर मैनेजमेंट में राज्य सरकार फेल
कमेटी के चेयरमैन पी. भट्टाचार्य ने कहा कि बाॅर्डर को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी स्टेट और सेंट्रल गवर्नमेंट की है। उनसे जब पूछा गया कि सरहदी लोगों को एजुकेशन, हेल्थ, रोड, पेयजल, रोजगार तथा पंजाब पुलिस की तैनाती आदि का जिम्मा तो स्टेट गवर्नमेंट का है और दूसरे राज्यों की तुलना में पंजाब सरकार कहां स्टैंड करती है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह मामले राज्य सरकार के हैं और उसे ध्यान देना चाहिए। हालात से लगता है कि राज्य सरकार फेल रही है। हालांकि दूसरी तरफ राज्य सभा तथा कमेटी मेंबर प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार का दायित्व ज्यादा बनता है।
220 गांवों की 21,000 एकड़ जमीन फंसी
रघबीर सिंह के मुताबिक 1989-90 के दौरान पंजाब से सटे बॉर्डर एरिया पर फेंसिंग तो लगाई गई मगर फेंसिंग में अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फाजिल्का, अबोहर और तरनतारन जिलों के 220 गांवों की लगभग 21,000 एकड़ जमीन इसकी जद में आ गई है। सुरक्षा कारणों से किसान न तो वहां पर तीन फिट से ऊंची फसल उगा सकता है और ना ही अपनी मर्जी से जा-आ सकता है।
बदलता रहा मुआवजे का क्राइटेरिया
सुरजीत सिंह ने बताया, शुरुआती दौर में प्रति एकड़ 2,500 रुपए का मुआवजा मंजूर किया गया था मगर वह भी कुछ ही दिन मिल सका। जब वह अदालत में गए तो इसे 3,500 किया गया मगर सिरे नहीं चढ़ा। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की तो 3,000, 4,400 और 8,400 रुपए मुआवजा तय किया और फिर वह बंद हो गया। अदालत ने 2014 में 10,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा के आदेश दिए थे, मगर आज तक अमल नहीं हो सका है।
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