अमृतसर. उन्हें ये फिक्र है हरदम, नया तर्जे जफा क्या है? हमें ये शौक देखें, सितम की इंतहा क्या है। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की ये पंक्तियां उनके साहस, हौसले और देशभक्ति की भावना को दर्शाती हैं। उनका साहस उनके लिखे हर एक पत्र, उनकी जेल डायरी और हर शब्द में झलकता है।
भगत सिंह को फांसी मुकर्रर हो चुकी थी। सजा से कुछ दिन पहले भगत सिंह की मां विद्यावती उनसे मिलने पहुंचीं। तब भगत सिंह ने कहा था कि मां मेरा शव लेने आप नहीं आना। कुलबीर (भाई) को भेज देना। भगत ने कहा, ‘यदि आप आएंगी तो आप रो पड़ेंगी और मैं नहीं चाहता कि लोग ये कहें कि भगत सिंह की मां रो रही है’।
आगे की स्लाइड्स में जानें भगत की जिंदगी की दास्तां...