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डाउनलोड करेंअमृतसर. सांसद नवजोत सिंह सिद्धू को लोकसभा चुनाव के लिए गठित कमेटी में भी जगह न दिए जाने से यह साफ हो गया है कि भाजपा की प्रदेश इकाई उन्हें अमृतसर की संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाने की इच्छुक नहीं है। वैसे भी लोकसभा चुनावों के समीप होने के बावजूद सिद्धू की गतिविधियां शून्य हैं। ऐसा लग रहा है कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष कमल शर्मा यहां से उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। हालांकि कमल ने ऐसी संभावना होने से इंकार किया है। बीते समय पर रोशनी डाली जाए तो प्रदेशाध्यक्ष का पद संभालने के बाद से ही कमल शर्मा की गतिविधियां शहर में खासी बढ़ गई हैं, वह हर छोटे बड़े कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं। उन्होंने अपनी टीम में भी शहर के नेताओं को विशेष स्थान दिया गया।
तरुण चुग को प्रदेश का महासचिव, राजिंदर मोहन सिंह छीना को भाजपा का उपाध्यक्ष, डा. सुभाष शर्मा को प्रदेश सचिव बनाया गया था। हाल ही में केवल कुमार पूर्व एसपी को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। इतना ही नहीं नरेश शर्मा के सिर पर जिला शहरी प्रधान का ताज सजाया गया और जिला टीम में किसी भी सिद्धू समर्थक को जगह नहीं दी गई। इसी माह राष्ट्रीय संगठन मंत्री राम लाल के दौरे के दौरान सिद्धू ने साफ किया था कि उनकी कमल शर्मा से बात हुए दो वर्ष बीत गए हैं। सिद्धू दुहाई देते रहे कि उन्हें किसी कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता तक नहीं दिया जाता। यानी दोनों के रिश्तों में खटास साफ है। शर्मा की कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी से घनिष्ठ मित्रता है। इसलिए उनके उम्मीदवार होने से अकाली दल को कोई ऐतराज नहीं होगा, जबकि सिद्धू को प्रत्याशी बनाए जाने पर उनका कड़ा विरोध होगा, क्योंकि पहले ही सिद्धू और कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया में वाक युद्ध हो चुका है।
गत वर्ष सितंबर माह में सिद्धू ने मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल और उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर प्रोजेक्टों को रोके जाने के आरोप लगाए थे। यहां तक कि उन्होंने मरणव्रत पर बैठने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद से ही उन्होंने शिअद को अपना विरोधी बना लिया। हालांकि सुखबीर बादल कहते रहे हैं कि भाजपा जिसे टिकट देगी शिअद उसे समर्थन देगा, लेकिन जिस तरह से अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के पुतले जलाए। उससे नहीं लगता कि अकाली सिद्धू को लोकसभा का प्रत्याशी स्वीकार करेंगे। इस संबंध में सिद्धू ने फिर दोहराया कि वह चुनाव लड़ेंगे तो अमृतसर से वर्ना नहीं। सूत्रों की मानें तो अंतिम समय में पार्टी उन्हें राज्यसभा की सदस्यता आफर कर उन्हें प्रचार करने की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
सांसद अलग-थलग, शर्मा का नहीं कोई विरोधी
शर्मा ने प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक भी अमृतसर में ही रखी। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए, लेकिन इसमें सिद्धू गैर-हाजिर रहे। मौजूदा हालात बयां कर रहे हैं कि सिद्धू को अलग-थलग कर दिया गया है। वैसे तो छीना लोकसभा टिकट पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन अंतिम समय में यहां से शर्मा द्वारा ताल ठोकने का वह कोई विरोध नहीं कर पाएंगे। परिस्थितियों पर नजर दौड़ाई जाए तो यहां से कमल शर्मा ही उम्मीदवार हो सकते हैं। शर्मा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सलाहकार भी रह चुके हैं।
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