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डाउनलोड करेंअमृतसर. बस स्टेंड परिसर में दुकान कर रहे रणजीत सिंह को सिविल जज अमरदीप सिंह की अदालत ने पक्के तौर पर दुकान करने का फैसला सुनाया है। रणजीत सिंह ने अदालत में केस दायर किया था कि बस स्टेंड के सुपरिंटेंडेंट अनिल कुमार व डिप्टी सुपरिंटेंडेंट अमरकबीर सिंह उसे तंग करते हैं और दुकान चलाने के बदले में 10 हजार रुपये महीना दिए जाने की मांग करते हैं, जबकि उसने दुकान का ठेका रोहन एंड राजदीप कंपनी से लिया है और हर महीने 6 हजार रुपये किराया भी अदा कर रहे हैं। इस पर अदालत ने सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए रणजीत सिंह के हक में फैसला सुनाया।
अदालत ने उसे पक्के तौर पर दुकान करने के आदेश दिए हैं। रणजीत सिंह ने बताया कि उसने 1 अप्रेल 2012 को दुकान ली थी और ट्रेवल एजेंसी के तौर पर काम शुरू किया। उसका काम अच्छे से चल पड़ा तो उक्त लोगों ने उसे तंग करना शुरू कर दिया और हर महीने पैसे देने की मांग करने लगे। इसके विरोध में उसने कोर्ट केस दायर कर दिया। हालांकि पैसों संबंधी किसी भी बात को उक्त लोगों ने नकार दिया है। इस पर कोर्ट ने उन्हें वहीं पर दुकान करने का फैसला दिया है।अमृतसर त्न बस स्टेंड परिसर में दुकान कर रहे रणजीत सिंह को सिविल जज अमरदीप सिंह की अदालत ने पक्के तौर पर दुकान करने का फैसला सुनाया है।
रणजीत सिंह ने अदालत में केस दायर किया था कि बस स्टेंड के सुपरिंटेंडेंट अनिल कुमार व डिप्टी सुपरिंटेंडेंट अमरकबीर सिंह उसे तंग करते हैं और दुकान चलाने के बदले में 10 हजार रुपये महीना दिए जाने की मांग करते हैं, जबकि उसने दुकान का ठेका रोहन एंड राजदीप कंपनी से लिया है और हर महीने 6 हजार रुपये किराया भी अदा कर रहे हैं। इस पर अदालत ने सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए रणजीत सिंह के हक में फैसला सुनाया।अदालत ने उसे पक्के तौर पर दुकान करने के आदेश दिए हैं।
रणजीत सिंह ने बताया कि उसने 1 अप्रेल 2012 को दुकान ली थी और ट्रेवल एजेंसी के तौर पर काम शुरू किया। उसका काम अच्छे से चल पड़ा तो उक्त लोगों ने उसे तंग करना शुरू कर दिया और हर महीने पैसे देने की मांग करने लगे। इसके विरोध में उसने कोर्ट केस दायर कर दिया। हालांकि पैसों संबंधी किसी भी बात को उक्त लोगों ने नकार दिया है। इस पर कोर्ट ने उन्हें वहीं पर दुकान करने का फैसला दिया है।कोर्ट ने बस स्टैंड में पक्के तौर पर दुकान करने का सुनाया फैसला
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