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आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाई के लिए बढिय़ा माहौल देना ही मकसद : कृष्णामूर्ति

8 वर्ष पहले
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अमृतसर. यूएस में एक अंग्रेजी अखबार में नंगली गांव में शाम 4 बजे से लेकर 6 बजे तक चल रहे एम रियल फ्री स्कूल के बारे में पढ़ा था। हैरान थी कि 19 वर्षीय मिथुन कुमार (संस्था के प्रधान) खुद पढऩे के साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को भी पढ़ा रहे हैं। इसके बाद उसके साथ फेसबुक फ्रेंड बनी और इस सेवा से प्रभावित होकर स्कूल के बच्चों से मिलने की चाह 18 अक्टूबर 2012 को भारत खींच लाई।

यह कहना है वर्तमान में यूएस में बसी इंदिरा कृष्णामूर्ति प्रधान का, जोकि शनिवार को यूएस से दूसरी बार स्कूल में बच्चों के साथ मिलने नंगली गांव पहुंची थी। उन्होंने कहा कि मिथुन और उनकी टीम खुद स्टूडेंट होने के साथ ही ऐसे बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जोकि आर्थिक तंगी के कारण स्कूल नहीं जा रहे और फेल हुए बच्चों को दोबारा तैयार कर रहे हैं। इसमें संस्था के महासचिव अर्नेस्ट एलबर्ट भी पूरा सहयोग दे रहे हैं।

पहले यह बच्चे खुले आसमान के नीचे किराये की जगह पर पढ़ते थे, अब 100 गज की जमीन पर दो मंजिला स्कूल बन गया है, जिसे देखकर मैं बहुत खुश हूं। अभी स्कूल में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की जरूरत है, जिसके लिए 12000 डालर इकट्ठे करने का लक्ष्य रखा है, और आधा पैसा इकट्ठा हो चुका है। यूएस में दर्जन के करीब लोग इस अभियान के साथ जुड़ चुके हैं।

यूएस के समाचार पत्र हुफिंगटन पोस्ट में स्कूल के बारे में खबर प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि स्कूल को अपग्रेड करने के लिए आन लाइन फंड इकट्ठा करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए वह एम रियल फ्री स्कूल की वेबसाइट लांच करेंगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसके साथ जुड़ें और बच्चों की संख्या बढऩे के साथ ही उनको पढ़ाई के लिए बढिय़ा माहौल और आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई जा सके।

बंगाली टोला में भी खोला स्कूल

फ्री स्कूल संस्था के प्रधान मिथुन ने बताया कि वह ग्रेजुएशन कर रहे हैं, उन्होंने मजीठा रोड बाईपास राम नगर कालोनी के बंगाली टोला में भी फ्री स्कूल शुरू किया है, जहां 200 के करीब बच्चें पढ़ रहे हैं।