(बॉर्डर पर कमर तक पानी में डूबकर पहरा देते भारतीय सेना के जवान)
जम्मू/श्रीनगर/नई दिल्ली/अमृतसर. जम्मू कश्मीर में लोगों को बचा रही सेना को बाढ़ की वजह से भारी नुकसान हुआ है।
कश्मीर घाटी में मौजूद सैन्य शिविरों में सैकड़ों एके, इनसास और एसएलआर राइफलें पानी में डूबी हुई हैं। इनमें से कई बेकार हो चुकी हैं। बम, हैंड ग्रेनेड और बाकी गोला-बारूद खराब हो चुका है। अपने जंगी साजो-सामान की फिक्र न करते हुए सेना हर दिन 20 घंटे राहत अभियान चला रही है। इस बीच, उत्तरी कश्मीर में अचानक जलस्तर बढ़ने पर चिंता जताई जा रही है। पिछले रविवार जब बाढ़ का पानी बढ़ने लगा तो श्रीनगर के गोगजीबाग इलाके में केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के 400 जवानों को कैम्प छोड़ना पड़ा था। एक जवान का कहना है, ‘हमें आदेश थे कि सब कुछ वहीं छोड़कर पहले अपनी जान बचाएं। वहां हमारे हथियार डूबे हुए हैं।’ पानी में डूब जाने के बाद बम और हैंड ग्रेनेड काम नहीं आ सकेंगे।
राहत का सामान पहुंचा रहे हेलिकॉप्टरों, विमानों पर कुछ जगह हो रहा पथराव
अकेले कश्मीर घाटी में वायुसेना के 80 विमान और हेलिकॉप्टर राहत अभियान में लगे हैं। इनमें से कुछ विमानों को हल्का नुकसान पहुुंचा है। इसकी वजह है कुछ लोगों का पथराव। एयर ऑपरेशंस के महानिदेशक एयर मार्शल एस.बी. देव कहते हैं, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम जिन्हें बचा रहे हैं, वे ही हम पर हमले कर रहे हैं।’ कुछ इलाकों में सेना की नौकाओं पर भी पथराव हुआ है।
बाढ़ में फंसी पाक सांसद ने की सेना की तारीफ
पाकिस्तानी मुस्लिम लीग (एन) की सांसद आयशा जावेद श्रीनगर दौरे पर आई थीं। लेकिन बाढ़ के बाद वे एक होटल में फंस गईं। सेना ने उन्हें शनिवार को हेलिकॉप्टर से बाहर निकाला। आयशा ने बाद में सेना के प्रयासों की तारीफ की।
खत्म नहीं हुई चुनौती: उत्तरी कश्मीर में अचानक बढ़ने लगा जलस्तर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि मध्य कश्मीर में बाढ़ का पानी कम हो रहा है, लेकिन वह झेलम के तटबंध की तरफ जा रहा है। उत्तरी कश्मीर के कुछ हिस्सों में अचानक जलस्तर बढ़ रहा है। यह चिंता का विषय है। राज्य के 1.5 लाख लाेग अब भी बाढ़ के पानी में फंसे हैं। हम उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
40,000 करोड़ रुपए का नुकसान
एसोसिएटेड चैंबर ऑफ ट्रेडर्स फेडरेशन का अनुमान है कि बाढ़ से कम से कम 40,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। बाढ़ से सेब, अखरोट और बादाम का उत्पादन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। उत्पादन में 50 फीसदी से ज्यादा गिरावट तय है।
बचाते-बचाते गई दो जवानों की जान
पिछले दिनों पुलवामा के राहत अभियान के दौरान दो जवान लापता हो गए थे। शनिवार को उनके शव बरामद हुए। उनकी पहचान नायक खेम चंद्रा तथा राइफलमैन मीर ओवैस हुसैन मीर के रूप में हुई है। लोगों को बचाते-बचाते इनकी जान चली गई।
आगे की स्लाइड्स में देखें, कश्मीर में बाढ़ के दौरान सेना द्वारा किए जा रहे राहत कार्यो की तस्वीरें..