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ये हैं सिखों के दस गुरु जिन्होंने कभी नहीं टेके मुगलों के आगे घुटने

6 वर्ष पहले
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सिख गुरु गोबिन्द सिंह जी। - Dainik Bhaskar
सिख गुरु गोबिन्द सिंह जी।
अमृतसर। सिख धर्म का भारतीय धर्मों में अपना एक पवित्र स्थान है। ‘सिख’ शब्द की उत्पत्ति ‘शिष्य’ से हई है, जिसका अर्थ गुरुनानक के शिष्य से अर्थात् उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करने वालों से है। गुरुनानक देव जी सिख धर्म के पहले गुरु और प्रवर्तक हैं। सिख धर्म में नानक जी के बाद नौ गुरु और हुए।
सिख धर्म की स्थापना 15वीं शताब्दी में भारत के उत्तर-पश्चिमी पंजाब प्रांत में गुरुनानक देव जी ने की थी। यह एक ईश्वर तथा गुरुद्वारों पर आधारित धर्म है। सिख धर्म में गुरु की महिमा पूजनीय व दर्शनीय मानी गई है।
सिखों के 9वें गुरु तेग बहादुर जी के बेटे थे गुरु गोबिन्द जी। इनका जन्म बिहार के पटनासाहिब में हुआ था। ये सिख धर्म के अंतिम गुरु माने जाते है। इन्हें 9 वर्ष की आयु में ही गद्दी मिल गई थी। इन्होंने अपने जीवन में देश और धर्म के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया था। बाद में गुरु गोबिन्द सिंह ने गुरु प्रथा समाप्त कर गुरु ग्रंथ साहिब को ही एकमात्र गुरु मान लिया।
गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु माने जाते हैं। उनका जन्म 22 दिसंबर, 1666 ई. को पटनासाहिब में हुआ था। इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा है सिख धर्म के दस गुरुओं के बारे में ।
आगे की स्लाइड में पढि़ए, गुरुनानक देव जी के बारे में...

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