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लोहा दो हजार रुपए प्रति टन हुआ महंगा

8 वर्ष पहले
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पटियाला.लोहा नगरी मंडी गोबिंदगढ़ से लोहा व्यापारी अब दो हजार रुपए प्रति टन महंगे दाम पर लोहा निर्यात करेंगे। डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू लगातार गिरने के कारण मंडी गोबिंदगढ़ के लोहा व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। इसे घटाने का फैसला लिया गया है। पहले लोहा 30 हजार रुपए प्रति टन निर्यात होता था, लेकिन अब 32 हजार रुपए प्रति टन होगा।
इस फैसले के साथ ही अब बाजार में बिकने वाली लोहे के सामान गार्डर, सरिया, बड़े एंगल व लोहे का हर तरह का सामान के दामों में दस फीसदी का उछाल आएगा। मौजूदा समय में मंडी गोबिंदगढ़ में करीब 300 रोलिंग मिल चल रही हैं और यह मिलें रोजाना करीब सात हजार टन लोहा निर्यात कर रही है। यह लोहा देश के अलग-अलग राज्यों समेत बाहर भी भेजा जाता है, जबकि पंजाब में महज 10 से लेकर 15 फीसदी ही इस्तेमाल होता है।
'45 रोलिंग मिल व 120 इंडक्शन फर्नेस यूनिट बंद'
ऑल इंडिया स्टील री रोलर एसोसिएशन के प्रधान विनोद कुमार ने कहा कि बेहतर पॉलिसी की कमी से पहले ही इंडस्ट्री के हालात खराब चल रहे थे और अब रुपए की गिरावट ने हालत खराब कर दी है। गोबिंदगढ़ में इन समस्याओं के कारण 45 री रोलिंग मिलें बंद हो चुकी है और करीब 120 इंडक्शन फर्नेस यूनिट को भी ताला लग गया है। डॉलर की चढ़त के बाद फर्नेस यूनिट्स में लोहे को पिघलाने का काम काफी महंगा पड़ने लगा था। ऐसे में कुछ यूनिट्स तो पिछले दिनों के दौरान बंद हुई है।
पहले से मिले ऑर्डर के कारण बढ़ा वित्तीय बोझ
फोकल प्वाइंट इंडस्ट्री एसोसिएशन के मेंबर संजीव गोयल ने कहा कि गोबिंदगढ़ लोहे की खान है और यहां पर रोजाना टनों के हिसाब से व्यापार होता है। लोहा व्यापारी जिस कंपनी या व्यक्ति के साथ सौदा करती है तो उसके साथ एक रेट तय किया जाता है। रुपए की लगातार गिरावट के कारण व्यापारियों पर लोहे का सामान तैयार करने के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जबकि इन्हें तय रेट पर ही भुगतान किया जाएगा। इस वित्तीय बोझ के कारण अधिकतर लोहा व्यापारियों का बिजनेस ठंडा पड़ गया है और कुछ व्यापारी रुपए की वैल्यू के स्थाई होने का इंतजार कर रहे हैं।
यह है हाल
एक डॉलर 66 रुपए 17 पैसे
चालू हालत में कुल री रोलिंग मिल 300
रोजाना लोहे का उत्पादन 7 हजार टन
प्रति टन बढ़ोत्तरी 2000 रुपए