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कश्मीर में जलप्रलय: 'सैय्यद इश्फाक न होता तो हम जिंदा न होते'

7 वर्ष पहले
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राजासांसी. कश्मीर में हुई भारी तबाही के दौरान जहां कुछ कश्मीरियों ने अपनी मेहमान-नवाजी का फर्ज निभाया वहीं कुछ लोगों के बर्ताव ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। शनिवार शाम स्पाइस जेट की फ्लाइट से राजासांसी के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सुरक्षित पहुंचे लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई।

जैतों मंडी के कपड़ा व्यापारी अशोक कुमार और राकेश कुमार का परिवार उन खुशनसीबों मेंं से एक है, जो कश्मीर में बरपे कहर में से सुरक्षित निकल आया। कश्मीर में हुई तबाही के बारे में पूछने पर परिवार के लोगों ने कहा, "रब्ब दा नेक बंदा सी सैय्यद इश्फाक अहमद कादरी, जे ओ साड्डी मदद न करदा तां अज्ज असी जिंदे न हुंदे।'

परिवार वालों का कहना था कि वह जिस होटल शिराज में ठहरे थे उसके मालिक कादरी ने मुसीबत की उस घड़ी में वहां ठहरे लोगों को बचाने के लिए खुद की जान की भी परवाह नहीं की। वह हम सब को धीरज बंधाता रहा और कहता रहा कि अगर यहां पानी अधिक आ गया तो उसके घर के दरवाजे उनके लिए खुले हैं। उसके होते हुए कश्मीरी मेहमानों को कुछ नहीं हो सकता। उसने इतने दिनों तक होटल में ठहरे लोगों को मुफ्त खाना खिलाया। यही नहीं जब हम वापस लौटने लगे तो उसका कहना था कि आपको जितने पैसों की जरूरत है आप ले जाओ। घर पहुंच कर अगर पैसे लौटना चाहो तो लौटा देना। हमारी उससे कोई जान पहचान नहीं थी, लेकिन उसनेे कश्मीरियों की मेहमान-नवाजी का सबूत देकर इंसानियत का सिर ऊंचा कर दिया।

वहीं दूसरी ओर अमृतसर के रहने वाले इंजीनियर हरजीत सिंह, उनकी पत्नी जसबीर कौर और भांजी इकविंदर कौर जिस होटल में ठहरे थे, वहां का मालिक और स्टाफ तबाही का भयानक मंजर देखकर ग्राहकों को वहीं छोड़ भाग खड़ा हुआ।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से कश्मीर में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू की गई मुहिम के तहत 47 लोग कश्मीर से स्पाइस जेट की फ्लाइट से अमृतसर पहुंचे।
जैतों मंडी के कपड़ा व्यापारी अशोक कुमार और राकेश कुमार का परिवार उन खुशनसीबों मेंं से एक है, जो कश्मीर में बरपे कहर में से सुरक्षित निकल आया।