नवांशहर. बंगा के किसान एडवोकेट राजपाल सिंह गांधी को स्टीविया फार्मिंग को प्रमोट करने के लिए एग्रीकल्चर टूडे नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित करेगी। देश भर से किसानों ने नाॅमिनेशन किए थे। फार्मिंग लीडरशिप कैटेगिरी के लिए के लिए गांधी चुने गए हैं। उन्हें 27 सितंबर को दिल्ली के ताज होटल में होने वाले समागम में अवाॅर्ड दिया जाएगा।
देश में स्वीट रेवेल्यूशन के प्रमोटर गांधी को स्टीविया (औषधि) के जरिए किसानों को फार्मिंग डाइवर्सिफिकेशन संग जोड़ने के लिए पंजाब सरकार भी 15 अगस्त को स्टेट अवाॅर्ड दे चुकी है। गांधी ने न सिर्फ चंद सालों में किसानों के लिए स्टीविया के जरिए कमाई के रास्ते खोल दिए, बल्कि अपने फार्म पर 30 हजार पौधे लगाकर पर्यावरण को बचाने में भी अहम रोल अदा कर रहे हैं।
पोजेवाल में 150 एकड़ का फार्म देश का पहला स्टीविया सेंटर बनने जा रहा
एडवोकेट गांधी ने बताया, साल 2000 में उन्होंने खेती के लिए पोजेवाल के पास 6 एकड़ जमीन खरीदी। जमीन उपजाऊ नहीं थी। उन्होंने सबसे पहले वहां पौधे लगाए। 2005 में स्टीविया की खेती शुरू की। पाॅली कल्चर व टिश्यू कल्चर के जरिए किसानों को भी इससे जोडने का मन बनाया। अब उनके पास अपना 150 एकड़ का फार्म है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उनके स्टीविया फार्म में देश का पहला यूनिट लगाया गया है। कुछ दिनों में उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। फार्म में टिशु कल्चर लैब भी है। जिससे टिशु कल्चर के जरिए स्टीविया उगाने वाला यह देश का पहला केंद्र बन जाएगा।
शुगर के मरीजों के लिए स्टीविया
स्टीविया ऐसी मीठी हर्बल है, जिसका यूज शुगर के मरीज चीनी की जगह कर सकते हैं। इससे शुगर के साथ-साथ कैंसर से भी बचाव होता है। केंद्र सरकार स्टीविया की खेती को प्रमोट कर रही है। स्टीविया का खेत एक बार लगाया जाता है और पांच साल में 12 से 15 बार कटिंग होती है। इससे किसान गेहूं व धान से पांच गुणा कमा सकते हैं।