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डाउनलोड करेंअमृतसर. अगर आप सिविल अस्पताल में हैं और वहां आग लगने की कोई घटना घट जाती है तो आप वॉटर फायर सेफ्टी सिस्टम या वहां लगे फायर सेफ्टी सिलेंडरों पर आश्रित न रहें। अस्पताल का वॉटर फायर सेफ्टी सिस्टम पहले से ही कंडम हो चुका है और सिलेंडर कभी भी धोखा दे सकते हैं। सिविल अस्पताल में मंगलवार डॉक्टरों व स्टाफ के लिए आयोजित फायर सेफ्टी वर्कशाप ने अस्पताल में लगे सिलेंडरों की पोल खोलकर रख दी। वर्कशाप के दौरान जैसे ही ट्रेनर ने सिलेंडरों के माध्यम से आग बुझाने की कोशिश की तो उन्होंने काम ही नहीं किया।
पहले दो सिलेंडरों ने जवाब दे दिया, जबकि तीसरे सिलेंडर ने चलने पर ट्रायल के लिए लगाई आग को बुझाया जा सका। घटना के बाद अस्पताल के एसएमओ डॉ. हरदीप सिंह घई ने सिलेंडर रीफिल करने वाली कंपनी की पेमेंट रोकने के आदेश दे दिए। यह कंपनी जालंधर की दुआ फायर प्रोटैक्शन इंजीनियर्स है। अस्पताल में वॉटर सेफ्टी सिस्टम के कंडम होने के बाद फायर सेफ्टी की पूरी जिम्मेदारी अस्पताल में लगे सिलेंडर पर है। सेहत विभाग ने भी तीन साल पहले सिविल अस्पताल में सिलेंडर भेजे थे। समय के साथ सिलेंडरों की समय अवधि खत्म हो गई और अस्पताल प्रशासन ने इन्हें रीफिल करवाने के लिए टेंडर निकाले।
यह ठेका जालंधर की कंपनी दुआ फायर प्रोटैक्शन इंजीनियर्स को दिया गया। इन सिलेंडरों को 22 अक्टूबर के पास रीफिल किया गया और वापिस अस्पताल में भेजा गया। पेमेंट से पहले अस्पताल प्रशासन ने फायर सेफ्टी वर्कशाप की इच्छा जताई। इसमें जालंधर की कंपनी के ही सेफ्टी एडवाइजर ट्रेनिंग देने पहुंचे। जैसे ही ट्रेनर ने पहला सिलेंडर चलाने की कोशिश की उसने जवाब दे दिया। दूसरे सिलेंडर का प्रयोग किया गया, लेकिन वह भी किसी काम न आया। आखिर में तीसरे सिलेंडर को मंगवाया गया और उसने ट्रेनिंग के लिए लगाई गई आग को बुझाया।
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