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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. सेक्सुअल हैरासमेंट, जेंडर सेंसेटाइजेशन और वॉयलेंस अगेंस्ट वुमन संबंधित सब्जेक्ट अब पंजाब यूनिवर्सिटी के कैंपस और इसके कॉलेजिस में पढ़ाया जाएगा। इसका सिलेबस तैयार करने के लिए पीयू ने कमेटी का गठन कर दिया गया है। सीनियर फीमेल टीचर्स वाली ये कमेटी ही कोर्स कंटेंट तय करेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मिले निर्देश के बाद पंजाब सरकार ने पीयू को यह निर्देश जारी किए थे। पंजाब सरकार के खिलाफ एक पीआईएल पर कोर्ट ने ये गाइडलाइंस जारी की हैं। हालांकि इससे पहले यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने भी बीते साल जनवरी में ऐसी ही गाइडलाइंस दी थीं। इस पर एक साल तक पीयू ने कोई काम नहीं किया। पीयू के अलावा पीयू चंडीगढ़, जीएनडीयू सहित पंजाब की सभी यूनिवर्सिटीज को यह निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली में निर्भया केस के करीब एक महीने बाद यूजीसी ने गाइडलाइंस जारी की थीं कि देश की सभी यूनिवर्सिटीज जेंडर सेंसेटाइजेशन पर काम शुरू करें। उन्होंने इसे कोर्स कंटेंट का हिस्सा बनाने संबंधित सिफारिशें मांगी थीं। उसके बाद पीयू के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए कई वाइस चांसलर ने भी इसकी पुष्टि की थी कि इस पर काम होगा। लेकिन ये काम एक साल बाद शुरू हुआ वह भी स्टेट एजुकेशन डिपार्टमेंट के जरिए कोर्ट की गाइडलाइंस के बाद। कोर्ट ने गाइडलाइंस दी हैं कि वायलेंस अगेंस्ट वुमन को करिकुलम का पार्ट बनाओ। इसमें उन्हें वायलेंस है क्या और इस संबंधित कानून बताए जाएंगे। इसे कॉलेज एजुकेशन का हिस्सा बनाया जाएगा। जेंडर सेंसेटाइजेशन पर सेमिनार एवं जागरुकता अभियान चलाए जाएंगे।
स्कूल-कॉलेजिस में ट्रांसपोर्टेशन का क्या इंतजाम है, ये जानकारी भी कोर्ट ने मांगी है। पीयू ने इसके लिए प्रो. राजेश गिल, प्रो. निष्ठा जायसवाल और सेंटर फॉर वुमन स्टडीज एंड डिवेलपमेंट की चेयरमैन वाली कमेटी का गठन किया है। कमेटी ही यह तय करेगी कि इसे सिलेबस का हिस्सा कैसे बनाया जाए। उसके बाद इसे पीयू कैंपस के अलावा कॉलेजिस को भी भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाल ही में पीयू के सर्वे में भी साबित हुआ है कि महिलाओं को इस संबंधित कानूनों की जानकारी नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट किसी महिला के रंग-रूप या रहन-सहन को लेकर ताने देने को भी हिंसा करार दे चुकी है।
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