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पाकिस्तानी बता भारत भेजा जा रहा अमेरिकन ड्राईफ्रूट्स

7 वर्ष पहले
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अमृतसर। अमेरिका और ईरान के ड्राईफ्रूट को पाकिस्तानी बताकर माफिया जम्मू-कश्मीर के रास्ते भारत भेज रहे हैं। इससे भारतीय ट्रेड को 300 करोड़ सालाना का नुकसान हो रहा है। वहीं इंपोर्ट ड्यूटी के 200 करोड़ सालाना की चपत के अलावा राज्य सरकार को वैट का भी नुकसान हो रहा है। 2008 में यूपीए सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर और जम्मू-कश्मीर के रिश्ते सुधारने के लिए समझौता किया था। इसके तहत इन आइटम्स को इंपोर्ट-एक्सपोर्ट टैक्स से फ्री कर रखा गया है। यह खुलासा ट्रेड से जुड़े कारोबारियों ने किया।
इस ट्रेड में सक्रिय माफिया के लोग पाकिस्तान में पड़ते मुजफराबाद में कंट्री आॅफ ऑरिजन (देश की पैदावार) का जाली सर्टिफिकेट बनाकर भारत के कारोबार और रेवेन्यू को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यही नहीं इसकी आड़ में उड़ी और पुंछ रूट से ड्रग्स व हथियार भी भेजे जा रहे हैं।
अमेरिकन बादाम लुधियाना पोर्ट और छेहर्टा में आता है
समझौते के तहत दोनों तरफ के कश्मीर में प्रोड्यूस और इस्तेमाल होने वाली 21 आइटम्स को इंपोर्ट-एक्सपोर्ट टैक्स फ्री किया गया था। इसकी आड़ में माफिया अन्य देशों में उगे ड्राईफ्रूट को पाकिस्तानी बताकर कश्मीर के रास्ते से देश के अन्य हिस्सों में सप्लाई कर रहे हैं। अमेरिकन बदाम लुधियाना ड्राईपोर्ट और कंटेनर फ्रेट छेहर्टा में आता है। जैन्यून ट्रेडर्स प्रति किलो के पीछे इंपोर्ट ड्यूटी और वैट के 75 रुपए भर रहे हैं। जबकि पाक के नाम पर दूसरे देशों से मंगवाया गया टैक्स फ्री ड्राईफ्रूट सस्ते में सप्लाई होने से कारोबार और रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है।
हथियार और ड्रग्स भी सप्लाई कर रहा
ट्रेड सूत्रों के मुताबिक भारत और पाक में बाॅर्डर ट्रेड होती है। जिसमें माल के बदले में माल भेजा जाता है। भारत की तरफ से पाकिस्तान को रोजमर्रा जरूरत की कई आइटम्स भेजी जाती हैं। पाकिस्तान के पास खुद का सामान ना होने के कारण वह अन्य देशों का माल ही बदले में भेजता है। इस दौरान अंडर वैल्यू बिल पर माल भेजकर बाकी बची एमाउंट के हथियार और ड्रग्स आते हैं। कुल मिलाकर इसे रोका जाना बेहद जरूरी है।
पूर्व पीएम से भरोसा मिला, मोदी से है उम्मीद
इंडो फॉरेन चेंबर आॅफ काॅमर्स के प्रधान बलबीर बजाज के मुताबिक उनकी एसोसिएशन का एक शिष्टमंडल दो बार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला था। और इस गंभीर मुद्दे से उन्हें अवगत भी करवाया था। अफसोस की उनकी तरफ से आश्वासन देने के बावजूद मुद्दा सुलझ नहीं पाया है। ट्रेड रूट से कई बार हथियार और ड्रग्स पकड़े जा चुके हैं। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उम्मीद है कि देश की सुरक्षा और रैवेन्यू के नुकसान को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे को संजीदगी से लेंगे।
समझौता खत्म करे केंद्र
केंद्र इस समझौते को एकतरफा खत्म कर दे या फिर ड्राईफ्रूट पर इंपोर्ट ड्यूटी 35 रुपए प्रति किलो से घटा 10 रुपए कर दे। बता देंं कि राइस, कीमती नग, गद्दे, नमदा, पेशावरी लेदर चप्पल, जड़ी बूटी, फ्रेश फ्रूट्स एंड वेजिटेबल, ड्राई फ्रूट, शहद, मूंगी, इमली, ब्लैक मशरूम, वुडन हैंडिक्राफ्ट्स कारपेट, एंब्रायडरी आइटम्स, कुशन, पिल्लो, शालें और स्टाल आदि भारत सप्लाई होती है। वहीं भारत से एक्सपोर्ट होने वाली आइटम्स में कारपेट्स, रग्स, वाल हैंगिंग, शॉल्स एंड स्टाल, नमदा, गद्दे, एंब्रायडेड आइटम्स, फर्नीचर, वुडन हैंडिक्राफ्ट्स, फ्रेश फ्रूट्स और वेजिटेबल, ड्राई फ्रूट, सैफरान, जड़ी बूटी इत्यादि शामिल हैं।