अमृतसर। महाराजा रणजीत सिंह के जरनैल रहे शाम सिंह अटारी वाला का शहीदी दिवस दस फरवरी को मनाया जा रहा है। इसके लिए चौक नारायण गढ़ स्थित उनके स्मारक और अटारी गांव में बने समाधि स्थल पर आयोजन होगा। इसके लिए तैयारियां भी कर ली गई हैं। इस तारीख को यह तामझाम हर साल होता है और फिर भुला दिया जाता है। यही कारण है कि करोड़ों रुपए की लागत से बना स्मारक आज खस्ताहाल हो चुका है।
जरनैल की शहादत और उनकी बहादुरी को जिंदा रखने के लिए उनके परिजनों द्वारा चलाए जा रहे जरनैल शाम सिंह अटारी वाला ट्रस्ट की पहल पर अटारी गांव में बने समाधि स्थल को ठीक करवाया गया था और उसके बाद चौक पर गेट-वे ऑफ इंडिया बना कर वहां 2010 में जरनैल का आदमकद बुत लगाया गया। बुत पर लगे 40 लाख समेत इस प्रोजेक्ट पर कुल चार करोड़ खर्च किए गए थे। इसके बाद इसके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली।
इस कारण स्मारक परिसर में लगी लाइटें, बिजली की तारें, बल्ब और पानी की मोटर तक चोरी हो चुकी है। पूरे साल सिर्फ इस स्मारक की एक बार ही आयोजन के वक्त सफाई होती है। हालांकि शुरुआती दौर में कहा गया था कि जब तक कोई जिम्मेदारी नहीं लेता तब तक इसे नगर निगम संभालेगा। ट्रस्ट के महासचिव और जरनैल के वंशज कर्नल हरिंदर सिंह का कहना है कि अटारी रेलवे स्टेशन, इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और अटारी रोड का नाम जरनैल के नाम पर किए जाने की मांग की गई थी। इस बाबत सभी विभागों ने केंद्र सरकार की जिम्मेदारी डाल कर इतिश्री कर ली।
शहादत पर ढाई लाख ने दी श्रद्धांजलि, अब 100 भी नहीं होते
कर्नल का कहना है कि जब जरनैल शहीद हुए थे उस वक्त ढाई लाख लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे, मगर आज दुखांत है कि इस आयोजन में 100 लोग भी नहीं पहुंचते। इसके लिए वह सरकारों की अनदेखी को जिम्मेदार करार देते हैं। उनका कहना है कि इस बार तो सरकार ने अखबारों में इसका इश्तिहार तक नहीं दिया है। इससे साबित होती है कि सरकार शहीदों के प्रति गंभीर नहीं है।
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