अमृतसर में मां दुर्गा की मूर्तियां तैयार करते बंगाल से आए कलाकार।
अमृतसर. पंजाब के विभिन्न शहरों में मनाए जाने वाले दुर्गा पूजा त्योहार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बंगाल के कलाकारों ने मूर्तियां बनाने का काम शुरू कर दिया है। मां दुर्गा की मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी पश्चिम बंगाल से मंगाई गई है।
चार कारीगरों के संग मूर्तियां बना रहे कारीगर शिव कुमार पाल बताते हैं कि बंगाल में जिस मिट्टी से मां दर्गा की मूर्ति बनाई जाती है उसमें सोना गाछी (रेड लाइट एरिया) की मिट्टी का कुछ अंश जरूर होता है। यह बंगाल की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि हर औरत मां का स्वरूप है। अगर वह भटकी है तो समाज की गलतियों के कारण। एक अन्य कारीगर माणिक बताते हैं कि मूर्ति में सोना गाछी जैसे बदनाम इलाके की मिट्टी मिलाने का मतलब नारी को सम्मान देना है। यहां पर वह महिलाएं बोरी में भर कर मिट्टी लाती हैं। जब मूर्ति बनानी होती है तो यहां की मिट्टी में उसका कुछ हिस्सा मिला दिया जाता है।
पांच महीने पंजाब में रहते हैं कारीगर
यहां बंगाली बस्ती में पूरे जिले के लिए मूर्तियां तैयार करने वाले पश्चिम बंगाल के कारीगर शिव कुमार पाल ने बताया कि दशकों से वह यहां पर आ रहे हैं। बताया कि वे लोग यहां पर जून महीने में आते हैं और लोगों के आॅर्डर के मुताबिक मूर्तियां उपलब्ध कराते हैं। फिर दीवाली के बाद वापस अपने गांव चले जाते हैं।
पाल ने बताया कि जिस तरीके से वह अमृतसर में मूर्तियां तैयार करते हैं उसी तरह से उनके लोग राज्य के प्रमुख शहर जालंधर, लुधियाना, पटियाला आदि जिलों में भी मूर्तियां बनाते हैं। पाल के साथ काम करने वाले कारीगर गोपाल का कहना है कि पंजाब में दुर्गा पूजा का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पहले बंगाल के लोग ही इसमें हिस्सा लेते थे, लेकिन अब यहां के स्थानीय लोगों की भी भागीदारी बढ़ गई है।
मां दुर्गा के अलावा ये मूर्तियां भी
पाल ने बताया कि दुर्गापूजा के लिए वे लोग दुर्गा मां, उनकी सवारी शेर, महिषासुर, पार्वती, सरस्वती, गणेश जी, कार्तिकेय की मूर्तियां करते हैं। अब यहां पर विश्व कर्मा पूजा के लिए भी मिट्टी की मूर्तियां तैयार की जाने लगी हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें, मां दुर्गा की मूर्तियों की तस्वीरें..