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'क्या बताऊं साहब, मेरे लिए तो हिफाजत हा बन गई सबसे बड़ी मुसीबत'

8 वर्ष पहले
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अमृतसर. सर! जब से सिक्योरिटी मिली है, तब से कहीं जाना भी मुहाल हो गया है। कहीं जाना होता है तो सिक्योरिटी में तैनात सीआरपीएफ जवान तो गाड़ी में बैठ जाते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से दूसरी गाड़ी मुहैया न करवाए जाने के कारण परेशानी आ रही है। इतना ही नहीं परिजन रोजी-रोटी कमाने के लिए काम पर भी नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। यह गुहार तरनतारन पुलिस का शिकार युवती और परिवार ने रविवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उप-चेयरमैन विधायक राजकुमार वेरका के पास लगाई। वेरका ने मौके पर सीआरपीएफ के आला अधिकारियों और जिला प्रशासन को बनती राहत देने के निर्देश जारी किए।

पीडि़ता और उसके पिता के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो गाडिय़ां और सुरक्षा मुहैया करवाने के आदेश दिए थे। उन्हें मात्र एक गाड़ी मुहैया करवाई गई है, जिसमें सुरक्षाकर्मी सवार रहते हैं। सुरक्षाकर्मी उन्हें सिर्फ गुरुद्वारा ही जाने देते हैं। सरकार या प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई आर्थिक मदद भी मुहैया नहीं करवाई गई है। वह अपने घर के भीतर ही नजरबंद होकर रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा मामला दबाने के लिए बाहर से धमकियां भी मिल रही हैं। मौके पर सीआरपीएफ कमांडेंट संजीव कुमार से फोन पर बात करके पीडि़त परिवार के साथ नर्मी से पेश आने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने तरनतारन के डीसी को फोन कर पीडि़त परिवार के लिए गाड़ी का इंतजाम करने और सोशल वेल्फेयर विभाग को परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए कहा।

लोगों की सेवा की ख्वाहिश
'उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती हूं। अफसरशाही की सीनाजोरी पर कभी किसी के साथ नाइंसाफी नहीं करूंगी। मेरा मकसद जरूरतमंदों की मदद करना रहेगा।Ó यह संकल्प तरनतारन पुलिस की पीडि़ता का है। उसने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष पढ़ाई की ख्वाहिश जाहिर करते हुए आर्थिक तंगी के आड़े आने की बात कही है। वेरका ने पीडि़ता की फ्री पढ़ाई के लिए डीईओ को निर्देश जारी करने का भरोसा दिलाया है।