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रामतीर्थ विवाद: समझौता करवाने को प्रशासन ने कोर्ट से मांगा समय

7 वर्ष पहले
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अमृतसर. 21 सालों से चले आ रहे श्री रामतीर्थ स्थित धूना साहिब के कब्जे के विवाद को शांतमय तरीके से हल करवाने के लिए जिला प्रशासन ने अदालत से समय मांगा है। यह पहल उस वक्त की गई है, जब वाल्मीकि समुदाय के लोग भंडारी पुल पर भूख हड़ताल पर बैठे थे और उधर, अजनाला की कोर्ट में 31 जनवरी को सुनवाई है।

ये था मामला

धूना साहिब स्थल पहले महंत बलदेव गिरि और उनके समर्थकों के पास था। 1993 में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने इसमें कब्जा कर लिया। उसदौरान भी खूनी झड़प हुई थी। इसके बाद मामला अदालत में चला गया, जहां से महंतों के पक्ष में कई बार फैसला हुआ।

अदालत की तरफ से बार-बार

बेल्फ भेज कर कब्जा दिलवाने का आदेश हुआ मगर पुलिस ने सहयोग नहीं किया।
उसी कड़ी के तहत वीरवार
को भी बेल्फ 10वीं बार कब्जा दिलवाने का आदेश लेकर पहुंचा, मगर पुलिस की तरफ से चुनिंदा लोग ही पहुंचे। इसके बाद बेल्फ ने अदालत को लिखकर सारी स्थिति बताई है।
सरकारों ने बनाया तमाशा
इसी दौरान कई सरकारें आई और चली गई, मगर मामले को सुलझाने की बजाय उलझाया जाता रहा। सरकारों की तरफ से यहां निर्माण के लिए चार बार नींव पत्थर रखा गया। 18 अक्टूबर 2013 को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी नींव पत्थर रखा और विवाद फिर से तूल पकड़ गया। इसके बाद महंतों के पक्ष में हिंदू न्याय पीठ का गठन किया गया।

समझौते की तैयारी

जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों को समझौते के लिए राजी किया जा चुका है। इस संदर्भ में धूना साहिब ट्रस्ट के चेयरमैन ओम प्रकाश गब्बर का कहना है कि प्रशासन ने इसकी पेशकश की है। भगवान वाल्मीकि तीर्थ प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन प्यारा लाल अंजान का कहना है कि मामले को शांतमय तरीके से हल किया जाना चाहिए। इसी तरह से महंत बलदेव गिरि और पीठ के रमेश शर्मा का कहना है कि प्रशासन ने इस बाबत अदालत से समय मांगा है ताकि मिल बैठ कर मामले का हल किया जा सके। हालांकि इस बाबत डीसी रवि भगत से बात करने की कोशिश की गई मगर उनका मोबाइल फोन बंद होने के कारण संपर्क नहीं हो सका।