पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंअमृतसर. दरबार साहिब स्थित सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में मौजूद श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पुरातन हस्त लिखित स्वरूप, गुरबाणी के टीके, गुरबाणी खोज, सिख इतिहास से संबंधित पुरातन दस्तावेज और किताबों का संरक्षण अत्याधुनिक तकनीक से किया जाएगा। इसके लिए बनाई गई सब कमेटी की बैठक बुधवार को हुई, जिसमें इस संबंध में विचार-विमर्श किया गया।
सब कमेटी में एसजीपीसी के जनरल सेक्रेटरी सुखदेव सिंह भौर, अंतरिम कमेटी के मेंबर राजिंदर सिंह मेहता, एसजीपीसी के पूर्व मेंबर अमरिंदर सिंह, सेके्रटरी रूप सिंह, सतबीर सिंह तथा जीएनडीयू के डॉ. बलवंत सिंह को शामिल किया गया है। बैठक में इन लोगों के अलावा एसजीपीसी के एडिशनल सेक्रेटरी बलविंदर सिंह जौड़ा सिंघा, लाइब्रेरी के इंचार्ज भूपिंदर सिंह, लाइब्रेरियन बगीचा सिंह और नानकशाही ट्रस्ट के डायरेक्टर दविंदर सिंह भी मौजूद थे।
बैठक में इन सभी दस्तावेजों को संरक्षित करने का अहम फैसला लिया गया। भौर ने बताया कि इसके लिए नानकशाही ट्रस्ट मोहाली से अनुबंध किया गया है। उनका कहना है कि संरक्षण अत्याधुनिक तकनीक से होगा। इस दौरान फैसला लिया गया कि अमृतसर के अलावा तलवंडी साबो बठिंडा, पंथ रत्न गुरचरण सिंह टोहड़ा इंस्टीट्यूट पटियाला में भी लाइब्रेरियां खोली जाएंगी। उनका कहना है कि ऐसी ही बैठक होने वाले फैसले भविष्य में एसजीपीसी की कार्यकारिणी की बैठक में रखे जाएंगे और वहां से मंजूरी मिलने के बाद अगली कार्रवाई होगी।
जानकारी के लिए बताते चलें कि 1984 में हुए आपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान इस लाइब्रेरी का काफी नुकसान हुआ था। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने आरोप लगाया था कि यहां से बहुत सारे अहम दस्तावेज सेना उठा कर ले गई, हालांकि इस आरोप को सेना ने सिरे से खारिज कर दिया था।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.