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डाउनलोड करेंअमृतसर. समय सुबह 11 बजे स्थान बाबा मीर शाह एक घर के बाहर सेहत विभाग की गाड़ी आकर रुकती है। गाड़ी में से ड्रग इंस्पेक्टर अनुपमा और सुखदीप सिंह अंदर दाखिल होते हैं। विभाग को सूचना थी कि यहां पर अवैध रूप से डिलीवरीज की जा रही हैं और बिना लाइसेंस दवाइयां रखी गई हैं। अंदर देखा तो एक महिला को घर में ही बने लेबर रूम में लेटा रखा था। इससे पहले कि विभाग की टीम कुछ कर पाती कि महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया। टीम ने पहले तो महिला के साथ आए उसके पति फूलचंद और भाभी सुनीता से पूछा कि आप सरकारी अस्पताल छोड़ कर इस गली में डिलीवरी करवाने क्यों आए हैं? तो उनका जवाब था कि हमें बेबे नानकी चाइल्ड केयर सेंटर में तैनात कर्मचारी ने कहा था कि जीएनडीएच में आपके अधिक पैसे खर्च होंगे। इसलिए आप वहां चले जाएं।
उन्होंने बताया कि वह नौ महीने से बेबे नानकी चाइल्ड केयर सेंटर में ही पत्नी का चैकअप करवाते रहे। टीम ने दुकान और घर में पड़ी दवाओं का रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया। यहां पर पड़ी 15 दवाओं का रिकार्ड भी डाक्टर के पास नहीं था। इतने में ही वहां पर बेबे नानकी सेंटर में काम करने वाली महिला कैलाश कौर और टीबी अस्पताल में कार्यरत लैब टेक्नीशियन जगजीत सिंह वहां पर आ गए।
घर में डिलीवरी कर रही डाक्टर इन दोनों की बेटी है। इनका मौके पर आना इस बात के संकेत हैं कि अस्पताल में केस करवाने वाली महिलाओं को निजी सेंटर में भेजने में इन्हीं का ही हाथ है। हालांकि दोनों ने सफाई दी है कि वह किसी काम से यहां पर आए थे। डाक्टर अमनदीप ने कहा कि वह डिलीवरी करने में माहिर हैं, इसलिए उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। बिना बिल के रखी दवाओं को लेकर उसने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने दवाएं कब्जे में लेकर आलाधिकारियों को आगे की कार्रवाई करने के लिए लिख दिया है। बेबे नानकी सेंटर में गायनी विभाग की मुखी डॉ. सुजाता कहती हैं कि यदि अस्पताल के किसी कर्मी ने महिला को निजी सेंटर में डिलीवरी के लिए भेजा है तो यह गलत है।
ऐसा करना नियमों के खिलाफ है, क्योंकि जच्चा-बच्चा मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार ने सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी की व्यवस्था फ्री कर रखी है। इसके लिए इलाके की आशा वर्कर की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। सिविल सर्जन को इस मामले की जांच करानी चाहिए।
(जैसा की अनुज शर्मा ने देखा)
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