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तीन मासूमों को जिन्दा निगल गई आग, शॉपिंग ही करते रह गए मां-बाप

9 वर्ष पहले
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अमृतसर . बल कलां गांव में हुए हादसे के बाद प्रत्येक व्यक्ति के मन में एक टीस उठ रही थी। उठे भी क्यों न, दुर्घटना ही ऐसी थी और तीन मासूम बच्चों से जुड़ी हुई। तीनों ने आग में झुलसकर अपनी जान गंवा दी। घटना के समय वह तीनों घर में कैद थे। मासूमों ने एक-दूसरे को बचाने के लिए हाथ-पैर मारे होंगे, लेकिन छोटे-छोटे हाथ कुदरत के निर्दयी और भयानक रूप के सामने हार गए।

अमरजीत मजदूरी कर पांच वर्षीय जसबीर सिंह, तीन वर्षीय कीर्तन दीप सिंह और डेढ़ साल की बेटी नवदीप कौर का लालन-पालन कर रहा था। उसकी पत्नी ने परमजीत कौर ने बड़ी मन्नतें कर तीनों बच्चों को पाया था। वह खाना बनाने के लिए घर में उपलों का इस्तेमाल करते थे। शनिवार को सुबह से लगातार बारिश हो रही थी।

उपलों को गीला होने से बचाने के लिए परमजीत ने उन्हें घर के अंदर रख दिया, ताकि रात को खाना बनाने में ज्यादा परेशानी न हो। उसे क्या पता था कि वह बच्चों के अंतिम संस्कार का सामान छोड़कर जा रही है। दुर्भाग्यवश बारिश भी लगातार होती रही। बिजली भी चली गई और परमजीत पति के साथ किसी काम से बाजार चली गई। बिजली के आते ही घर की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ।

चिंगारियां उपलों पर जा गिरीं। उस समय बच्चे रजाई में सो रहे थे। चिंगारियां धीरे-धीरे धुएं का रूप लेने लगीं। दम घुटने से बच्चों की नींद खुल गई। जसबीर अपने भाई-बहनों में बड़ा था। उसने कीर्तनदीप और नवदीप को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए होंगे, लेकिन कुदरत के भयानक रूप के सामने उसकी एक नहीं चली।

आखिर तेजी से फैली आग ने तीनों को चपेट में ले लिया। मासूम चीखे होंगे, चिल्लाएं होंगे, परंतु ठंड के कारण लोग घरों में कैद थे। उनकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था, जो मौके पर पहुंच सके। शाम को परमजीत और अमरजीत सिंह अपने आशियाने में पहुंचे तो उनकी दुनिया उजड़ चुकी थी।